सोशल मीडिया के लिए किसी नए कानून का प्रस्ताव नहीं : वैष्णव
इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का अध्ययन कर रही है। डिजिटल तकनीक के लाभों के साथ ही बच्चों के लिए जोख़िम जैसे हानिकारक कंटेंट और साइबर बुलिंग की समस्याएं बढ़ी हैं। इसके मद्देनज़र, सरकार नए कानून लाने की योजना नहीं बना रही।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियामकों का अध्ययन कर रही है। हालांकि, अभी नया कानून लाने की कोई योजना नहीं है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि डिजिटल तकनीक ने शिक्षा और नवाचार के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन बच्चों के लिए इसके जोखिम जैसे हानिकारक कंटेंट तक पहुंच, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और डिजिटल लत जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। इसलिए सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दुनियाभर में लाए गए अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियामक ढांचों का अध्ययन कर रही है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए उपाय
मंत्री ने बताया कि संवैधानिक अधिकारों, कानूनी आवश्यकताओं, तकनीकी क्षमता और निजता के बीच संतुलन बनाते हुए घरेलू नीतियों की भी समीक्षा की जाती है। बच्चों की सुरक्षा के लिए तमाम कदम उठाए गए हैं। आईटी ऐक्ट 2000 और आईटी नियम 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट मध्यस्थों के लिए ड्यू डिलिजेंस (उचित सतर्कता) का पालन करना अनिवार्य है। हाल के संशोधनों के तहत सक्षम अदालत या सरकार के आदेश के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों के लिए केवल तीन घंटे के भीतर गैर-कानूनी या हानिकारक सामग्री हटानी अनिवार्य है। डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के लागू होने से बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को कानूनी ताकत मिली है। बच्चों के किसी भी डिजिटल पर्सनल डाटा के इस्तेमाल के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य है। बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार की ट्रैकिंग और उन पर लक्षित विज्ञापनों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही, बच्चों की जागरूकता के लिए नियमित तौर पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
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