राहत सामग्री व अन्य लाभ के लालच में जान जोखिम में डाल रहे बाढ़ पीड़ित
सरयू की बाढ़ और कटान से प्रभावित परिवारों के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। सरसंडा, बतनेरा, अकौना और पर्वतपुर में 657 परिवारों को आवास दिए गए हैं। बावजूद इसके, कई परिवार सरकारी आवासों में रहने के बजाए बांध के अंदर बस जाते हैं। प्रशासन द्वारा राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सूरतगंज (बाराबंकी)। सरयू की बाढ़ और कटान से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्थायी ठिकाना देने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायत सरसंडा, बतनेरा, अकौना और पर्वतपुर में बीते वर्षों में 657परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास दिए गए। इसके बावजूद कई परिवार सरकारी आवासों में रहने के बजाए बाढ़ आते ही बांध के अंदर जाकर बस जाते हैं। राहत सामग्री व राशन किट आदि के लिए यह बाढ़ पीड़ित अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। तहसील रामनगर क्षेत्र के विकास खण्ड सूरतगंज में बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायत सरसंडा, बतनेरा, अकौना और पर्वतपुर इन चार बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में वर्ष 2022-23 से अब तक 158 लोगों को प्रधानमंत्री आवास और 499 लोगों को मुख्यमंत्री आवास दिए जा चुके हैं। वहीं आवास प्लस योजना के तहत सर्वे में शामिल 736 पात्र लोगों को भी प्रधानमंत्री आवास अंतिम सितम्बर से दिए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। वर्ष 2022-23 से अब तक 1193 लोगों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ दिया गया है। कटान में घर गंवाने वाले परिवारों के लिए भी प्रशासन की ओर से सहायता दी गई है। घर कटान होने पर राजस्व विभाग से 214 लोगों को मकान निर्माण के लिए अलग अलग 1.20 लाख रुपये दिए गए हैं। मो. आलम, छेदी, विक्रम और सुर्जरानी समेत कई लोगों को मुख्यमंत्री आवास मिल चुका है, लेकिन यह परिवार अब भी बांध के अंदर रह रहे हैं。
स्थायी आवास की समस्या
राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वित्तीय वर्षों 2023-24 से लेकर 2026 में पूरे तहसील क्षेत्र में आपदा राहत के तहत 1.20 लाख रुपये से कम की धनराशि 1204 लोगों को उपलब्ध कराई गई है। यानी बाढ़ और कटान से प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में सरकारी स्तर पर लगातार धनराशि खर्च की गई। इसके बावजूद धरातल की तस्वीर अलग दिखाई दे रही है।
स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट
कोट
जिन गांवों में लोग मकान तोड़ रहे हैं, उनमें वह लोग रहते नहीं हैं। 657 परिवारों को अलग- अलग सुरक्षित स्थानों पर सरकारी आवास दिए गए हैं। फिर भी यह लोग अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई गई है।
- देवेंद्र प्रताप सिंह, बीडीओ सूरतगंज।


