छोटे जूता कारोबारियों को एक साल मोहलत और मिली
डीसी अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का पालन करने के लिए मिला समय

नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने रबड़ और पॉलिमर से बने जूते-चप्पलों का निर्माण करने वाली सूक्ष्म और लघु इकाइयों (एमएसई) को बड़ी राहत दी है। अब इन इकाइयों को अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) का पालन करने के लिए एक और वर्ष की मोहलत दे दी गई है। अब उन्हें 31 जुलाई, 2027 तक गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर गुणवत्ता नियंत्रण नियमों में संशोधन किया है। इससे छोटे फुटवियर निर्माताओं को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का प्रमाणन हासिल करने और अपने उत्पादन को नए मानकों के अनुरूप ढालने के लिए अधिक समय मिल जाएगा。
नई व्यवस्था के तहत फुटवियर कंपनियों को छूट
नई व्यवस्था के तहत फुटवियर कंपनियां शोध एवं विकास (आरएंडडी), डिजाइन विकास और परीक्षण जैसे गैर-व्यावसायिक कार्यों के लिए हर साल 4,500 जोड़ी तक विदेशी फुटवियर बिना क्यूसीओ मानकों का पालन किए आयात कर सकेंगी। हालांकि, इन उत्पादों पर स्पष्ट रूप से ‘बिक्री के लिए नहीं’ लिखना होगा और बाद में इन्हें कबाड़ के रूप में नष्ट करना होगा।
लैदर फुटवियर के लिए अलग गुणवत्ता नियंत्रण
हालांकि, यह संशोधन केवल रबड़ और पॉलिमर वाली सामग्री से बने फुटवियर पर ही लागू होगा। चमड़े से बने फुटवियर के लिए अलग गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था लागू है, जिसके तहत 12 श्रेणियों के फुटवियर के लिए बीआईएस प्रमाणन अनिवार्य है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 62.88 करोड़ डॉलर के फुटवियर और संबंधित उत्पादों का आयात किया।
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