सुपौल : जंगल से बाहर भी वन्यजीवों के हमले परअब मिलेगी सरकारी मदद

हिन्दुस्तान, सुपौल
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अब जंगलों से बाहर आबादी वाले इलाकों में वन्यप्राणियों के हमले से होने वाली क्षति पर पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता मिलेगी। नई गाइडलाइन के अनुसार, मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल को 1.44 लाख रुपये और सामान्य घायल को 24 हजार रुपये का मुआवजा उपलब्ध होगा।

सुपौल : जंगल से बाहर भी वन्यजीवों के हमले परअब मिलेगी सरकारी मदद

सुपौल, नवीन कुमार। अब जंगलों से बाहर आबादी वाले इलाकों में भी यदि हाथी या अन्य वन्यप्राणियों के हमले से किसी व्यक्ति की मौत होती है, वह घायल होता है या पशुधन और संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता मिलेगी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने गैर-वन क्षेत्रों में वन्यजीवों से होने वाली क्षति पर सहायता राशि देने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके साथ ही पहली बार गैर-वन क्षेत्रों में होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष को व्यवस्थित रूप से राहत योजना के दायरे में लाया गया है।

संघर्ष और राहत योजना

वन विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों के जंगल से निकलकर गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इससे कई बार लोगों की जान गई, कई गंभीर रूप से घायल हुए तथा पशुधन और मकानों को भी नुकसान पहुंचा। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को राहत देने की मांग लगातार उठ रही थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ऐसे मामलों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नई गाइडलाइन के तहत वन्यप्राणी के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर आश्रितों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होता है तो उसे 1.44 लाख रुपये, जबकि सामान्य रूप से घायल होने पर 24 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। इसके अलावा हाथी या अन्य वन्यजीवों के हमले से दुधारू पशु, बैल, बकरी, भेड़ अथवा अन्य पालतू पशुओं की मौत होने पर भी निर्धारित श्रेणी के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। मकान, फसल तथा अन्य संपत्ति को नुकसान होने की स्थिति में भी विभागीय आकलन के आधार पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना और आर्थिक संकट से उबारना है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी गांव या आबादी वाले क्षेत्र में हाथी या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो लोग स्वयं उन्हें भगाने या पकड़ने का प्रयास नहीं करें। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से कार्रवाई कर सके। इसके लिए विभाग ने 1800-345-7252 टोल फ्री हेल्पलाइन भी जारी की है, जहां 24 घंटे सूचना और सहायता प्राप्त की जा सकती है।

मुआवजे की प्रक्रिया

वन अधिकारियों का मानना है कि बिहार के कई जिलों में समय-समय पर हाथियों के झुंड के प्रवेश और अन्य वन्यजीवों के आबादी में पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था से प्रभावित परिवारों को राहत मिलने के साथ-साथ वन विभाग और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा। विभाग को उम्मीद है कि इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में लोगों का भरोसा बढ़ेगा और घटनाओं की सूचना समय पर मिलने से नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। किन मामलों में कितनी मिलेगी सहायता राशि: वन विभाग की नई गाइडलाइन के तहत गैर-वन क्षेत्रों में वन्यजीवों से होने वाली क्षति पर भी आर्थिक सहायता मिलेगी। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। गंभीर रूप से घायल होने पर 1.44 लाख रुपये तथा सामान्य चोट लगने पर 24 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हाथी या अन्य वन्यप्राणियों के हमले में दुधारू पशु, बैल, बकरी, भेड़ सहित अन्य पालतू पशुओं की मौत पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार मुआवजा मिलेगा। मकान, फसल और अन्य संपत्तियों की क्षति का आकलन विभागीय टीम करेगी और तय मानकों के अनुरूप सहायता राशि स्वीकृत की जाएगी।

सूचना और सहायता की प्रक्रिया

जांच के बाद ही मिलेगी आश्रितों को सहायता राशि: वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी घटना के बाद पीड़ित या स्थानीय लोग तुरंत विभाग को सूचना दें। सूचना मिलने पर विभागीय टीम मौके पर पहुंचकर घटना का सत्यापन करेगी और जनहानि, पशुधन या संपत्ति के नुकसान का आकलन करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर पात्र लाभुकों को निर्धारित सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीव दिखने पर भीड़ न जुटाएं और न ही उन्हें भगाने की कोशिश करें। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। किसी भी आपात स्थिति, शिकायत या सहायता के लिए विभाग का टोल फ्री नंबर 1800-345-7252 जारी किया गया है। डीएफओ आतीश कुमार ने कहा कि गैर-वन क्षेत्रों में भी वन्यजीवों से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए विभाग ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। घटना की सूचना मिलते ही विभागीय टीम जांच करेगी और पात्र मामलों में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार शीघ्र सहाय्य राशि उपलब्ध कराई जाएगी। लोगों से अपील है कि वन्यजीव दिखने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें और किसी प्रकार का जोखिम न उठाएं। उन्होंने बताया कि प्रचार-प्रसार के लिए पंचायत स्तर पर मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ अभियान चलाकर उन्हें जानकारी दी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीड़ित परिवारों को किस तरह की सहायता मिलेगी?
पीड़ित परिवारों को विभिन्न परिस्थितियों में सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलेगी। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल होने पर 1.44 लाख रुपये तथा सामान्य चोट लगने पर 24 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
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