महानगर विस्तार के लिए सड़कों से सटे भूखंड पहले अधिग्रहित करेगा जीडीए
गोरखपुर विकास प्राधिकरण महानगर के विस्तार के लिए जमीन खरीद को प्राथमिकता देगा। मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत 25 गांवों में करीब 6000 एकड़ जमीन जुटाने की तैयारी है। सलाहकारों की टीम सर्वे, भू-स्वामित्व की जांच, और भूमि अधिग्रहण में सहयोग करेगी।
गोरखपुर, राजीव दत्त पाण्डेय महानगर के विस्तार की जमीन तैयार करने में गोरखपुर विकास प्राधिकरण आपसी सहमति से खरीद को पहली प्राथमिकता देगा। जमीन जुटाने की प्रक्रिया में मुख्य और सहायक सड़कों से सटे भूखंड पहले लिए जाएंगे ताकि एक-दूसरे से जुड़े भू-भाग आसानी से उपलब्ध हो सकें। इस प्रक्रिया में प्राधिकरण की मदद के लिए सलाहकारों की एक टीम हायर की जाएगी।
मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना
मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत नया गोरखपुर परियोजना शहर के उत्तरी और पूर्वी परिधि के 25 गांवों में करीब 6000 एकड़ जमीन जुटाने की तैयारी है। इसके लिए प्राधिकरण ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। कंसल्टेंट जमीन की पहचान, सर्वे, राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण, भू-स्वामित्व की जांच, भू-स्वामियों से बातचीत और जमीन के एकत्रीकरण से लेकर कब्जे तक प्राधिकरण को सहयोग करेंगे। जमीन जुटाने के लिए पहले लैंड पूलिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरे चरण में भू-स्वामियों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीद और इन दोनों विकल्पों के सफल न होने पर अनिवार्य भूमि अधिग्रहण होगा।
हर महीने रिपोर्ट प्राधिकरण को रिपोर्ट देंगे विशेषज्ञ
सलाहकारों की टीम प्रस्तावित क्षेत्र का अध्ययन कर चरणबद्ध योजना तैयार करेगी। इसमें प्राथमिक और द्वितीयक सड़कों से सटे भूखंडों को पहले शामिल किया जाएगा। जमीन इस तरह जुटाई जाएगी कि भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक साथ जुड़ा हुआ क्षेत्र मिल सके। कंसल्टेंट को हर महीने खरीदी या पूल की गई जमीन की स्थिति और आगे की रणनीति की रिपोर्ट प्राधिकरण को देनी होगी।
लैंड पूलिंग में भू-स्वामियों की सहमति अहम
लैंड पूलिंग के लिए चिह्नित जमीन का जीआईएस आधारित विस्तृत सर्वे होगा। कंसल्टेंट भू-स्वामियों से संपर्क कर योजना के लाभ समझाएंगे और नीति के अनुसार जरूरी भागीदारी सुनिश्चित कराने में सहयोग करेंगे। भू-स्वामियों से आवेदन, शपथपत्र और सहमति पत्र लेकर खसरा वार डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। राजस्व अभिलेख, टाइटल दस्तावेज और मौके के सत्यापन के जरिए मालिकाना हक की जांच होगी। आपत्तियों और दावों के निस्तारण में भी कंसल्टेंट सहयोग करेंगे। प्राधिकरण और भू-स्वामियों के बीच डेवलपमेंट एग्रीमेंट तैयार कराने, उसके निष्पादन में भी मदद मिलेगी।
ड्रोन और सैटेलाइट से होगा सर्वे
जमीन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए डीजीपीएस, हाई रिजोल्यूशन ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल होगा। राजस्व नक्शों को जीआईएस में डिजिटाइज और जियो-रेफरेंस करने के साथ भू-स्वामित्व के आंकड़ों को डिजिटल डाटाबेस से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक खसरे की स्पष्ट टाइटल स्थिति, बंधक और न्यायालय में चल रहे मुकदमों की रिपोर्ट तैयार होगी। सरकारी जमीन का अलग से सीमांकन होगा। कंसल्टेंट जमीन से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय आंकड़े और प्रगति रिपोर्ट को वेब आधारित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेंगे। इससे प्राधिकरण जमीन जुटाने की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी और रिपोर्टिंग कर सकेगा।
शहर के दक्षिणी परिधि में भी टाउनशिप की तैयारी
शहर के उत्तरी परिधि के 12 और पूर्वी परिधि के 13 गांवों में करीब छह हजार एकड़ जमीन जुटाने की योजना है। इसके अलावा शहर की दक्षिणी परिधि में नई टाउनशिप विकसित करने की तैयारी है। कंसल्टेंट का चयन प्रति हेक्टेयर न्यूनतम दर यानी एल-1 के आधार पर होगा। एल-1 दर से सहमत पात्र एजेंसियों को भी एम्पैनल किया जाएगा। करार की अवधि 12 माह होगी।
खास-खास
-जमीन अधिग्रहम में सुझाव देने के लिए हायर होगी सलाहकारों की एक टीम
- लैंड पूलिंग के बाद आपसी सहमति से खरीद, असफल होने पर अधिग्रहण
-बिखरे भूखंडों के बजाय लगातार जमीन का एकमुश्त क्षेत्र बनाने पर जोर


