स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने को बांस की खेती का होगा विस्तार
गोपालगंज में बांस की खेती को स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत 2026-27 में 21 जिलों में बांस की खेती का विस्तार होगा। 500 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य है, जिसमें गोपालगंज के लिए 25 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।

गोपालगंज। बांस की खेती को अब खेती के साथ-साथ स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में गोपालगंज समेत राज्य के 21 जिलों में बांस की खेती का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए करीब 2.38 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है। योजना के तहत राज्य में कुल 500 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य है। इसमें गोपालगंज जिले के लिए 25 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है
बांस की खेती का वर्तमान स्थिति
जिले में बांस की खेती पहले से ही किसानों के बीच मौजूद है। डिजिटल फसल सर्वे के अनुसार गोपालगंज में 1184.41 हेक्टेयर क्षेत्र में किसान बांस की खेती कर रहे हैं। ऐसे में नई योजना के जरिए खेती के मौजूदा दायरे को बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर पौध सामग्री, तकनीकी जानकारी और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना है। पोर्टल खुला हुआ है। भूमि उपयोग के साथ बढ़ेगी किसानों की आमदनी राष्ट्रीय बांस मिशन का उद्देश्य किसानों को बांस उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। खासकर ऐसी भूमि, जहां अन्य फसलों की खेती मुश्किल होती है, वहां बांस उत्पादन को उपयोगी विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे अनुपयोगी या कम उपयोग वाली जमीन से भी किसानों को आय का स्रोत मिल सकता है।
अनुदान और सहायता
50 फीसदी तक अनुदान, अधिकतम 36 हजार रुपए योजना में किसानों को बांस की खेती के लिए इकाई लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है। एक किसान को न्यूनतम 0.04 हेक्टेयर से अधिकतम 0.20 हेक्टेयर तक क्षेत्र में सहायता दी जाएगी। वास्तविक इकाई लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 36 हजार रुपए, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में मिलेगा। पौधरोपण के लिए अनुमोदित नर्सरियों से पौध सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
प्रशिक्षण और रोजगार
किसानों से कारीगरों तक प्रशिक्षण बांस उत्पादन बढ़ाने के साथ इससे जुड़े रोजगार को भी मजबूत करने की योजना है। किसानों के अलावा बांस से जुड़े हस्त शिल्पकारों, कारीगरों और उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्षेत्रीय प्रसार कर्मियों, उद्यान पदाधिकारियों और किसान सलाहकारों को भी योजना के संचालन से संबंधित प्रशिक्षण मिलेगा। विभाग के अनुसार योजना से करीब 6000 मानव दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है।
महिला किसानों की भागीदारी
महिला किसानों की भी होगी भागीदारी योजना में लाभुकों के बीच 30 प्रतिशत महिला किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। बजट में सामान्य, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित हिस्सेदारी के अनुरूप राशि खर्च करने का प्रावधान है। इससे बांस उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी कोशिश होगी।
पोर्टल पर आवेदन करें
वर्जन बांस की खेती करने के इच्छुक किसान पोर्टल पर आवेदन करें। आवेदित किसान को पहले आओ, पहले पाओं के तर्ज पर योजना का लाभ दिया जाएगा। आकाश कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी, गोपालगंज।(रिपोर्ट-प्रमोद तिवारी)


