Goodbye 2018 Life became Smart with smart gadgets and technological developments this year - अलविदा 2018 : ‘स्मार्ट’ जिंदगी की ओर बढ़े कदम 1 DA Image
15 नबम्बर, 2019|8:27|IST

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अलविदा 2018 : ‘स्मार्ट’ जिंदगी की ओर बढ़े कदम

स्मार्ट तकनीक का रहा बोलबाला
स्मार्ट तकनीक का रहा बोलबाला

साल 2018 को अलविदा कह हम 2019 का स्वागत करने के लिए बाहें फैलाकर तैयार हैं। इस बीतते साल में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) के क्षेत्र में दुनिया ने काफी तेजी से कदम बढ़ाए। भारत में भी इस क्षेत्र में काफी काम हुए। जून, 2018 में नीति आयोग ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर राष्ट्रीय रणनीति को पेश किया। आने वाले साल में भी एआई की धमक जारी रहने की उम्मीद है। 

इस साल एआई ट्रेंड में सबसे आगे ‘वॉयस असिस्टेंट’ रहा। एमेजॉन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, सैमसंग जैसी तमाम बड़ी कंपनियों ने एआई आधारित डिवाइस बाजार में उतारीं। गूगल इस मामले में काफी आगे रहा। गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने  गूगल डुप्लक्स को दुनिया के सामने उतारा, जो हूबहू इंसानी आवाज में बात कर सकता है। हमारे स्मार्टफोन में मौजूद एआई असिस्टेंट से ट्रैफिक जाम से बचना, रास्ता ढूंढना, सवाल का जवाब ढूंढना सब एक इशारे पर संभव हो गया है।  मार्केटिंग के क्षेत्र में भी एआई तकनीक का उपयोग इस साल कहीं ज्यादा किया गया। 

भारत में लंबे शोध व समीक्षा के बाद दिग्गज कंपनियों को आखिरकार क्षेत्रीय भाषाओं में खुद को लॉन्च करने में सफलता मिली। भारतीय रेलवे ने ट्रेन में खामी ढूंढने के लिए एआई रोबोट तैयार किया। एमेजॉन ने पहली बार अपनी हिंदी साइट लॉन्च की। गूगल  और फेसबुक ने भी हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में सामग्री प्रस्तुत करने के लिए ज्यादा बेहतर माहौल तैयार किया। गूगल के इंडिक कीबोर्ड में इस साल काफी सुधार हुए। 

नीति आयोग ने ‘एआई सबके लिए’ थीम पर अगले साल दो चरणों में विश्व हैकाथॉन शुरू करने की घोषणा की। नीति आयोग ने अपनी रणनीति में शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, स्मार्ट सिटी और स्मार्ट मोबाइलिटी क्षेत्रों को शामिल किया। एआई के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले संस्करण का आयोजन इसी महीने भारत में हुआ।

नए साल में बढ़ेंगे एआई पेशेवर

  • 16 सौ 24 करोड़ रुपये का सालाना बाजार हो चुका है भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का 
  • 40 हजार से ज्यादा एआई पेशेवर भारत में कार्यरत थे साल 2018 तक, नए साल में इसमें वृद्धि की संभावना
  • 30 फीसदी कंपनियां इस साल बढ़ीं देश में जिन्होंने एआई तकनीक को अपनाया 

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कहीं समाचार एंकर तो कहीं आया बने रोबोट
कहीं समाचार एंकर तो कहीं आया बने रोबोट

‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) तेजी से हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। दुनियाभर में ऐसी कई भूमिकाओं में अब इंसानों की जगह मशीनें लेने लगी हैं, जिसके बारे में पहले हमने सोचा भी नहीं था। चीन ने नवंबर महीने में दुनिया का पहला एआई समाचार एंकर पेश कर चौंका दिया। 

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ में अब आभासी एंकर खबर पढ़ते नजर आएंगे। इसे देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यह वास्तविक इंसान नहीं है। यह एंकर ठीक पेशेवर समाचार एंकर की तरह खबरें पढ़ सकता है। इस तकनीक को विकसित करने के लिए चीनी सर्च इंजन ‘सोगो’ ने अहम भूमिका निभाई।

भारत में रोबोट आरजे : इसी तरह भारत के एक एफएम चैनल ने दुनिया का पहली रोबोट आरजे लाने का दावा किया। रोबोट रश्मि नाम की इस आरजे को भारत में ही तैयार किया गया। रांची के रंजीत श्रीवास्तव ने महज 50 हजार रुपये में इसे तैयार किया था। 

बच्चे भी पाल रहे : चीन में एआई रोबोट बच्चों का पालन-पोषण में बदलाव ला रहे हैं। ये रोबोट वहां व्यस्त माता-पिता के लिए सुविधा बन चुके हैं। चीन में इस साल 3 करोड़ ऐसे रोबोट की बिक्री हो चुकी है। 

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चंद्रयान-1 की तस्वीरों से चांद पर बर्फ की पुष्टि हुई 
चंद्रयान-1 की तस्वीरों से चांद पर बर्फ की पुष्टि हुई 

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की ताकत को नासा ने भी माना। 21 अगस्त को नासा ने कहा कि चंद्रयान-1 द्वारा भेजे गए आंकड़ों की समीक्षा से चंद्रमा पर बर्फ मिलने की पुष्टि हुई है। अध्ययन में पाया गया कि बर्फ इधर-उधर बिखरे हुए हैं। दक्षिणी ध्रुव पर अधिकतर बर्फ लूनार क्रेटर्स के पास जमी हुई हैं। इसरो द्वारा 2008 में प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान-1 अंतरिक्षयान के साथ नासा के मैपर एम3 को भेजा गया था। ये बर्फ ऐसे स्थान पर पाई गई, जहां चंद्रमा के घूर्णन अक्ष के थोड़ा झुके होने के कारण सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंच पाती। 

कई अन्य मुकाम भी 

  • 380 किलोग्राम वजनी ‘हायपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सेटेलाइट’ को 29 नवंबर को लांच किया
  • 30 अन्य विदेशी उपग्रहों का भी इसरो ने इस दिन प्रक्षेपण किया 
  • 2 विदेशी उपग्रह पीएसएलवी-सी42 से सितंबर में लॉन्च किए गए 
  • 3423 वजनी संचार उपग्रह जीसैट-29 को नवंबर में प्रक्षेपित किया

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भारत ने खोजा ‘नन्हा’ ग्रह
भारत ने खोजा ‘नन्हा’ ग्रह

भारतीय वैज्ञानिकों ने जून, 2018 में एक ऐसे ग्रह को ढूंढ निकाला, जहां एक साल में महज 19.5 दिन होते हैं। यह खोज अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के प्रोफेसर अभिजीत चक्रवर्ती के नेतृत्व में एक वैज्ञानिक टीम ने की। नए ग्रह की खोज भारत में ही डिजाइन किए गए ‘पीआरएल एडवांस रेडियल-वेलोसिटी अबू-स्काई सर्च’ (पीएआरएएस) स्पेक्ट्रोग्राफ से की गई, जो ग्रह के द्रव्यमान की गणना करता है। यह नया ग्रह पृथ्वी से करीब 600 प्रकाश वर्ष दूर है। इसकी सतह का तापमान 600 डिग्री सेल्सियस है। 

 

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सबसे भारी सेटेलाइट लॉन्च किया 
सबसे भारी सेटेलाइट लॉन्च किया 

भारत के सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11 का प्रक्षेपण भी इसी साल हुआ। पांच दिसंबर को फ्रेंच गुयाना से एरिएयनस्पेस रॉकेट की मदद से सफल प्रक्षेपण किया गया। 

  • 5854 किलोग्राम वजन जीसैट-11 का 
  • 15 साल तक इस सेटेलाइट का जीवन 
  • जीसेट-11 से संचार सेवा और ज्यादा बेहतर होगी
  • ग्राम पंचायतों को भारतनेट प्रोजेक्ट के तहत कनेक्टिविटी मिलेगी 

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इसरो की अंतरिक्ष में ऊंची उड़ान
इसरो की अंतरिक्ष में ऊंची उड़ान

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने 19 दिसंबर को साल के अपने आखिरी मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जीसैट-7ए की लॉन्चिंग से वायुसेना की ताकत में कई गुना इजाफा होने की उम्मीद है। इससे न केवल वायुसेना के एयरबेस ही इंटरलिंक होंगे बल्कि इसके जरिए ड्रोन ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी। इसके जरिए ड्रोन आधारित ऑपरेशन में वायुसेना की ग्राउंड रेंज में अच्छा खासा इजाफा होगा।  

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