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सीबीआई अधिकारी एम.नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का नोटिस

The court has asked Nageswara Rao , the former interim director of CBI, and other officers to be pre

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के बावजूद बिहार में आश्रयगृह मामलों की जांच कर रहे सीबीआई के मुख्य अधिकारी एके शर्मा का तबादला किए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए अंतरिम निदेशक रहे एम नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस दिया है। अदालत ने उन्हें 12 फरवरी को कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि यह सरासर अवमानना का मामला है, इसके लिए छोड़ा नहीं जाएगा, अब भगवान ही तुम्हें बचा सकता है। 

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने शीर्ष अदालत के दो आदेशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया। न्यायालय की अनुमति के बगैर ही सीबीआई के संयुक्त निदेशक शर्मा का तबादला सीआरपीएफ में किए जाने के मामले में नागेश्वर राव को अवमानना नोटिस जारी किया।

पीठ ने एजेंसी के निदेशक ऋषिकुमार शुक्ला को उन अधिकारियों के नाम बताने का निर्देश दिया जो शर्मा का तबादला जांच एजेंसी से बाहर करने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। राव के साथ ये अधिकारी भी कोर्ट में पेश होंगे। इसके अलावा, पीठ ने सीबीआई के अभियोजन निदेशक भासुरन को भी न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। 

शीर्ष अदालत ने अपने पहले के अक्तूबर और 28 नवंबर के आदेशों का जिक्र किया जिसमें सीबीआई से कहा गया था कि शर्मा को बिहार आश्रयगृह मामलों की जांच के दल से हटाया नहीं जाए। 

दोहपर बाद दो बजे हुई सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई के वकील से कहा कि आप कोर्ट के आदेश से खेल रहे हो। इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि वह पूछकर बताएं कि जांच अधिकारी को क्यों हटाया गया। सीबीआई की ओर से एक डीएसपी ने शपथपत्र दायर किया और कहा कि नागेश्वर राव के कहने पर ही जांच अधिकारी का स्थानांतरण किया गया था। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या कैबिनेट की नियुक्ति कमेटी कोर्ट को इस आदेश की जानकारी दी गई थी कि जांच अधिकारी का तबादला नहीं करना है। सीबीआई ने कहा, नहीं। इसके बाद कोर्ट ने अधिकारी से पूछा कि यह शपथपत्र आपको को किसने दायर करने के लिए कहा है। अधिकारी ने कहा कि नागेश्वर राव ने। कोर्ट ने कहा कि याद रखो कि कानून ही आपका संचालनकर्ता है, कोई ब्यूरोक्रेट और कोई नेता आपका मालिक नहीं है। कोर्ट निवेदिता झा की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। 

इससे पूर्व सुबह के सत्र में कोर्ट ने इस मामले का ट्रायल दिल्ली की साकेत अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। 
गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक गैरसरकारी संगठन द्वारा संचालित आश्रय गृह में अनेक लड़कियों से कथित बलात्कार और उनके यौन उत्पीड़न का मामला सुर्खियों में आने के बाद बिहार पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की थी। बाद में शीर्ष अदालत ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

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  • Web Title:God help you SC says CBI Nageswara Rao in contempt of court