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गोवा चुनाव: कैसे पार होगी नैया? 10 साल में 4 फीसदी वोट का भी फासला तय नहीं कर पाई कांग्रेस

गोवा विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीतिक पार्टियों के पास खुद को साबित करने के लिए लगभग एक माह का वक्त है। यूं तो सभी दलों के लिए चुनाव अहम होते हैं, पर कांग्रेस के लिए यह चुनाव काफी...

गोवा चुनाव: कैसे पार होगी नैया? 10 साल में 4 फीसदी वोट का भी फासला तय नहीं कर पाई कांग्रेस
Himanshu Jhaसुहेल हामिद, हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Mon, 10 Jan 2022 08:34 AM

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गोवा विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीतिक पार्टियों के पास खुद को साबित करने के लिए लगभग एक माह का वक्त है। यूं तो सभी दलों के लिए चुनाव अहम होते हैं, पर कांग्रेस के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि, पार्टी के सामने सत्ता विरोधी वोट को एक रखते हुए दस साल से सत्ता पर काबिज भाजपा को हटाने की चुनौती है।

कांग्रेस इस चुनौती में कितनी सफल होगी, यह तो वक्त तय करेगा। पर पार्टी के पिछले प्रदर्शन को देखते हुए राह आसान नहीं है। क्योंकि, पिछले दस साल में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट का फासला बढ़ा है। वर्ष 2012 में भाजपा ने कांग्रेस से चार फीसदी वोट ज्यादा हासिल किए थे। इन चुनाव में भाजपा को 34 और कांग्रेस को 30 प्रतिशत वोट मिले थे।

2017 में मिली थी बीजेपी से अधिक सीट
वर्ष 2017 में कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा सीट हासिल की, पर उसका वोट प्रतिशत भाजपा से कम रहा। इनमें कांग्रेस को 28 और भाजपा को 32 फीसदी वोट मिले। लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां एक-एक सीट जीतने में सफल रही, पर भाजपा का वोट प्रतिशत कांग्रेस से 8 प्रतिशत ज्यादा रहा। ऐसे में कांग्रेस के लिए इस अंतर को पूरा करना आसान नहीं है।

भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर
भाजपा सत्ता विरोधी लहर और अपनी पार्टी के सबसे बड़े नेता मनोहर पर्रिकर के अभाव में चुनाव लड़ रही है। पर्रिकर का मार्च 2019 में निधन हो गया था। प्रदेश कांग्रेस नेता मानते हैं कि भाजपा बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है। मु्ख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। इसके बावजूद कांग्रेस की चुनौती बढ़ी हैं।

AAP और TMC भी मैदान में
इस बार आप पार्टी और टीएमसी पूरी शिद्दत से चुनाव लड़ रही हैं। पिछले चुनाव में आप पार्टी को छह फीसदी वोट मिला था। वहीं, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी ने भी लोगों के बीच अपनी पैठ बढाई है। ऐसे में कांग्रेस के लिए सत्ता विरोधी वोट को अपने पक्ष में एकजुट रखना मुश्किल होगा। सत्ता विरोधी वोट बंटता है, तो विपक्ष के लिए सत्ता आसान है।

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