खुशी पाने की कोशिश में बढ़ता जा रहा खालीपन
दुनिया में खुशी और वेलनेस के नाम पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर की इंडस्ट्री काम कर रही है। यह बाजार हर तीन साल में 20-25% बढ़ रहा है, लेकिन लोग फिर भी असंतोष का सामना कर रहे हैं। ये बातें डॉ. मीनाक्षी शहरावत ने एक शिक्षक सम्मेलन में कहीं, जिसमें विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों ने भाग लिया।
दुनिया में खुशी और वेलनेस के नाम पर करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर की इंडस्ट्री काम कर रही है। यह बाजार हर तीन साल में 20 से 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद लोगों में खालीपन और असंतोष बना हुआ है। खुशी किसी अंतिम मंजिल का नाम नहीं, बल्कि समस्याओं का सामना कर उन्हें सुलझाने की लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। यह बात डॉ. मीनाक्षी शहरावत ने शनिवार को आईसीएसआई के प्रयागराज चैप्टर की ओर से आयोजित शिक्षक सम्मेलन में कही। इसमें इविवि और उसके संबद्ध महाविद्यालयों, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, शुआट्स, नेहरू ग्राम भारती, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, यूनाइटेड यूनिवर्सिटी और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय समेत विभिन्न संस्थानों के करीब 90 से 100 शिक्षक और प्राध्यापक शामिल हुए।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि प्रो. अंशुमान मिश्रा, विशेष अतिथि डॉ. पवन जायसवाल और विशेष आमंत्रित अतिथि वित्त अधिकारी सीएस (डॉ.) हिमांशु श्रीवास्तव ने अपनी बात रखी। डॉ. पवन जायसवाल ने कंपनी सचिवों को कॉर्पोरेट तंत्र का मार्गदर्शक बताते हुए कंपनियों और एलएलपी के पारदर्शी संचालन व अनुपालन में उनकी भूमिका पर जोर दिया। सीएस छाया वालिया ने कॉर्पोरेट जगत में कंपनी सचिवों की भूमिका और संभावनाओं पर विचार रखे। आईसीएसआई प्रयागराज चैप्टर के अध्यक्ष सीएस अनुकूल उदय ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. श्रिया जायसवाल ने संचालन किया, जबकि चैप्टर की सचिव सीएस कृतिका गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सूंबुल और अमिताभ शुक्ला भी मौजूद रहे।


