सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को मिले स्थान

हिन्दुस्तान, मेरठ
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मेरठ में एक सम्मेलन में नए मौलिक अधिकार, स्वायत्तता और बुजुर्गों के कानूनी अधिकारों पर चर्चा की गई। डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने भारतीय धर्म के सिद्धांतों को वैश्विक ढांचे में स्थान देने की बात की। उन्होंने बुजुर्गों की गरिमा और कानूनी अधिकारों को सहयोग देने वाली नीतियों का सुझाव दिया।

सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को मिले स्थान

मेरठ। नए मौलिक अधिकार, स्वायत्तता, कानूनी क्षमता और सामाजिक, श्रम एवं डिजिटल समावेश के लिए व्यापक नीतियां’ विषय पर हुए सम्मेलन में सांस्कृतिक एवं दार्शनिक परंपरााओं को स्थान देने पर जोर दिया गया है। सीसीएसयू कैंपस में विधि अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ.विवेक कुमार त्यागी ने बुज़ुर्गों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए विश्व सम्मेलन में यह बात कही। डॉ.विवेक ने ’धर्म मीट्स राइट्स: हिंदू फिलॉसॉफिकल फाउंडेशन्स फॉर ए ग्लोबल चार्टर ऑफ ओल्डर एडल्ट्स ऑटोनॉमी, लीगल कैपेसिटी, एंड इंक्लूसिव डिजिटल फ्यूचर्स’ शीर्षक पर अपनी बात रखी। डॉ.त्यागी ने कहा कि बुजुर्गों के अधिकारों का वैश्विक ढांचा केवल पश्चिमी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित नहीं होना चाहिए बल्कि इसमें अन्य सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को भी स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने प्राचीन भारतीय धर्म के सिद्धांतों को व्यावहारिक और मजबूत आधार के रूप में प्रस्तुत किया। कहा कि मनुष्य की गरिमा और उसके कानूनी अधिकार शारीरिक या मानसिक क्षमता पर निर्भर नहीं होते बल्कि वे व्यक्ति के अस्तित्व में ही निहित हैं। उन्होंने डिजिटल तकनीक क्षेत्र में 'अहिंसा' के सिद्धांत को लागू करने का सुझाव दिया ताकि बुजुर्गों को धोखाधड़ी और कठिन तकनीकों से बचाया जा सके।

Praveen Dixit

लेखक के बारे में

Praveen Dixit

शॉर्ट बायो : प्रवीण दीक्षित पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में उच्च शिक्षा, मौसम एवं प्रदूषण बीट पर काम कर रहे हैं।


परिचय एवं अनुभव

प्रवीण दीक्षित भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) उच्च शिक्षा, मौसम एवं प्रदूषण बीट पर काम कर रहे हैं। 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


कॅरियर का सफर

प्रवीण दीक्षित ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2006 में अमर उजाला अखबार से की। यहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2008 में हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। अमर उजाला और हिन्दुस्तान दोनों ही समाचार पत्रों में उन्हें शिक्षा, मौसम और पर्यावरण बीट पर काम करने का मौका मिला। 2008 से वे हिन्दुस्तान में लगातार इन बीट को कवर कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

बीएससी बायोलॉजी, बीएड के साथ-साथ हिन्दी और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर होने से प्रवीण को विज्ञान, हिन्दी और पत्रकारिता का विशेष संयोजन मिला। इसी वजह से वह शिक्षा, विशेष रूप से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा पर कमांड के साथ ही इनोवेशन, रिसर्च और डाटा विश्लेषण पर केंद्रित स्टोरीज़ लिख रहे हैं।


उच्च शिक्षा और लक्ष्य

उच्च शिक्षा, मौसम और इससे जुड़े रिसर्च के विषयों पर प्रवीण की गहरी समझ है। उच्च शिक्षा में उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। प्रवीण का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।


विशेषज्ञता

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, शोध, यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई । डाटा विश्लेषण और इस पर केंद्रित समाचार
इनोवेटिव और रिसर्च बेस्ड न्यूज स्टोरीज

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