12 साल बाद गैंगस्टर में तीन दोषियों को तीन साल की कैद
नगर कोतवाली में तत्कालीन एसओ विवेकानंद तिवारी ने 2014 में दर्ज कराया था मुकदमा 12 साल बाद गैंगस्टर में तीन दोषियों को तीन साल की कैद 12 साल बाद गैंगस्

बांदा। संवाददाता 12 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश गैगेस्टर एक्ट श्रीपाल सिंह की अदालत ने तीन दोषियों को 3-3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने साथ ही 6-6 हजार रूपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की अदायगी ना करने पर 2-2 माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे की जानकारी
विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि कोतवाली नगर में तत्कालीन एसओ विवेकानंद तिवारी ने 2014 मे दोषी राहुल पुत्र रघुनाथ सोनी निवासी मो. स्वराज कालोनी बांदा व धरमपाल सिंह पुत्र रामचरन उर्फ राम भरोसे निवासी खैर थाना सिसोलर एवं अश्वनी सोनी पुत्र जगरूप सोनी निवासी टिकरी थाना मौदहा के विरूद्व सन् 2014 में गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा पंजीकृत कराया था। तीनों का एक संगठित गिरोह था। जो संगठित रूप से अपराध कर अपने आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए जनता को परेशान करते थे। इनके विरूद्व कई अपराध पंजीकृत थे। इनके गिरोह से जनता मे भय एवं आतंक का वातावरण पैदा होता था। इनके विरूद्व अपराधिक चार्ट बनाकर जिलाधिकारी बांदा से अनुमोदित कराकर न्यायालय मे पेश किया।मामले का आरोप पत्र तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक शिवमिलन एवं संतराम द्वारा किया गया।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 6 गवाह पेश किए गए।पत्रावली मे उपलब्ध साक्ष्यों व गवाहो के बयानात मे तीनों को दोषी पाकर सजा व जुर्माने से दंडित किया।
धारा एवं अपील प्रक्रिया
जनपद में गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) की अदालत ने तीनों अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा 6-6 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास
विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी की तहरीर पर वर्ष 2014 में मु0अ0सं0 475/2014 के तहत उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 में राहुल पुत्र भृगुनाथ प्रसाद सोनी, धर्मपाल सिंह पुत्र रामचरण उर्फ रामभरोसे तथा अश्वनी सोनी पुत्र जगरूप सोनी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था।अभियोजन के अनुसार तीनों अभियुक्त एक संगठित आपराधिक गिरोह के सदस्य थे, जो मिलकर अपराध कर आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे। इनके विरुद्ध पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और इनकी गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भय एवं आतंक का वातावरण बना रहता था। आम लोग इनके खिलाफ शिकायत करने और गवाही देने से भी डरते थे। पुलिस ने अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त किया। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक शिवमिलन एवं उपनिरीक्षक संतराम ने की। विवेचना के दौरान गैंग चार्ट, एफआईआर, सामान्य डायरी तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों का संकलन कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान 17 अगस्त 2015 को न्यायालय ने अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप तय किए। अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों के बयान दर्ज कराए और सभी आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। अभियोजन विभाग के समन्वय से समयबद्ध तरीके से साक्ष्य कराए गए। पैरोकार अभिलाष यादव, कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ एवं अमित की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में तीनों अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और ₹6,000-₹6,000 के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इस निर्णय को संगठित अपराध के विरुद्ध कानून की प्रभावी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।


