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डेबिट-क्रेडिट कार्ड का डाटा खरीद 'हनी ट्रैप' के लिए चुन रहे शिकार

honey trap cases in delhi   getty images istockphoto

अभी तक मोबाइल, क्रेडिट-डेबिट एवं बैंक खातों से जुड़ी जानकारियों के जरिये लोगों से ठगी की ही बात सामने आ रही थी लेकिन अब दिल्ली-एनसीआर में हनी ट्रैप के धंधे में सक्रिय गिरोह भी डाटा खरीद रहा है। गिरोह डाटा का इस्तेमाल अपने शिकार को चुनने में कर रहे हैं। इसके जरिये वे आसानी से व्यक्ति की आर्थिक हैसियत जान लेते हैं और फिर मिस्ड कॉल या फेसबुक के जरिये दोस्ती कर लेते हैं। यह खुलासा रोहिणी पुलिस द्वारा हनी ट्रैप के मामले में की गई गिरफ्तारी के बाद हुआ है। गिरोह के सदस्यों ने दक्षिण दिल्ली के आभूषण कारोबारी को फंसाकर दस लाख रुपये हड़प लिए थे। मामला सामने आने पर रोहिणी साउथ पुलिस ने सात महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इसमें गिरोह की सरगना मिट्ठू भी थी। जांच में सामने आया कि यह गिरोह शिकार को तलाशने के लिए डेबिट-क्रेडिट कार्ड, मोबाइल नंबर एवं बैंक खातों की सहायता लेता है। 

नया तरीका अपना रहे 

अभी तक हनीट्रैप के लिए युवतियां शिकार के अनुसार अलग-अलग हथकंडे अपनाती थीं। जैसे, यदि शिकार बिल्डर है तो उससे खरीदार बनकर या फिर डॉक्टर है तो उससे मरीज बनकर मिलती थीं। पार्टी आदि में भी शिकार तलाशती थीं लेकिन क्रेडिट कार्ड आदि के जरिये शिकार की तलाश नया तरीका है। 

निशाने पर 40 से 60 साल वाले 

सूत्रों के अनुसार, लोगों के बैंक खातों और डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी होने से उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में पता चल जाता है। साथ ही उम्र आदि के बारे में भी जानकारी मिल जाती है। गिरोह के लोग 40 से 60 साल के बीच के लोगों को शिकार बनाते हैं। मोबाइल नंबर के जरिए गलत नंबर डायल करने के बहाने शिकार से संपर्क साधते हैं। इसके अलावा इन जानकारियों के सहारे फेसबुक से भी जुड़कर दोस्ती करते हैं। 

कहां से खरीदते हैं डाटा

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जस्ट डायल पर सैकड़ों मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं जो ऐसी जानकारियां बेचते हैं। ये लोगों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड से लेकर मोबाइल नंबर एवं बैंक खातों तक की जानकारियां तक बेचते हैं। ये लोग विभिन्न काल सेंटर से डाटा चोरी करके जमा करते हैं। 

मिट्ठू-मुकेश गिरोह का फैला है आतंक 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में हनी ट्रैप के मुख्य तौर पर दो प्रमुख गिरोह सक्रिय हैं। एक गिरोह की सरगना मिट्ठू और दूसरे का मुकेश कुमार है। बताया जाता है कि मिट्ठू गिरोह ने ही चाणक्यपुरी स्थित फाइव स्टार होटल में मुंबई के कारोबारी को फंसाकर तीस लाख रुपये वसूले थे। इस मामले में मिट्ठू को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं दूसरे गिरोह का सरगना मुकेश अभी फरार चल रहा है। 

गैंग में सलाह देने के लिए वकील भी रखे हैं 

हनी ट्रैप गिरोह में सात-आठ महिलाएं और इतने ही पुरुष होते हैं। महिलाओं का काम ट्रैप करना होता है जबकि पुरुष का काम संकेत मिलने पर मौके पर छापा मारना होता है। इसमें कानूनी सलाह देने के लिए वकील भी होते हैं। एक सदस्य डाटा का अध्ययन करता है तो कुछ को हनी ट्रैप से मिले रुपये लेने और ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी दी जाती है। इसी तरह अन्य सदस्यों के भी काम बांटे गए हैं। जैसे ही कोई शिकार मिलता है, उसे फंसाने की योजना के साथ ही सभी को उसके हिस्से का काम समझा दिया जाता है। 

एसआई ने कर ली थी आत्महत्या

हनी ट्रैप के कारण 17 जनवरी 2016 को दिल्ली पुलिस के एक एसआई ने आत्महत्या कर ली थी। एसआई के संबंध एक युवती से हो गए थे जो बाद में उसे ब्लैकमेल करने लगी थी। 10 से 15 लाख रुपये देने के बाद भी युवती ने जब पीछा नहीं छोड़ा तो एसआई ने 17 जनवरी को द्वारका के एक पार्क में युवती को गोली मार दी और फिर खुद भी जान दे दी थी।

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  • Web Title:gangs honey trapping after buying data of debit and credit cards in delhi approach through missed call and Facebook