From Municipal Corporator to Member of Parliament know Sajjan Kumar long political journey - निगम पार्षद से सांसद तक, जानिए सज्जन कुमार का लंबा राजनीतिक सफर DA Image
6 दिसंबर, 2019|7:44|IST

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निगम पार्षद से सांसद तक, जानिए सज्जन कुमार का लंबा राजनीतिक सफर

Congress’ Sajjan Kumar Surrendered in Karkardooma Court on Monday in 1984 riots case(PTI)

वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार ने दिल्ली की राजनीति में निगम पार्षद से लेकर तीन बार लोकसभा सांसद बनने तक का लंबा राजनीतिक सफर तय किया लेकिन 1984 के सिख विरोधी दंगे में उनकी कथित संलिप्तता ने उनके कॅरियर पर रोक लगा दी और अंतत: इस मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा मामले में आजीवन कारवास की सजा सुनाए जाने के बाद कुमार ने सोमवार को यहां एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उन्हें उत्तर-पूर्व दिल्ली के मंडोली जेल में बंद करने के आदेश दिए हैं। सजा सुनाए जाने के बाद कुमार ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उनके नजदीकी सूत्रों ने कहा कि वह पुरानी दिल्ली के जटवाड़ा इलाके में पले-बढ़े और बाद में करोल बाग इलाके के प्रसाद नगर चले गए।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ''1970 के दशक में उन्होंने एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) का चुनाव लड़ा जिसमें कांग्रेस को महज 14 सीटें हासिल हुई थीं लेकिन नांगलोई से वह भारी बहुमत से जीते। 1977 में वह प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव बने।

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वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि कुमार की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके छोटे बेटे संजय गांधी से नजदीकी थी।जाट नेता कुमार ने 1980 के आम चुनावों में बाहरी दिल्ली सीट से जीत दर्ज कर राजनीति में ''बड़ी छलांग लगाई। इस चुनाव में उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश को हराया जो दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री थे।

लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक कुमार विधवा और गरीब महिलाओं की बेटियों की शादी में वित्तीय मदद मुहैया कराते थे, जे जे कॉलोनियों के निवासियों का पुनर्वास कराते थे, विकलांगों की मदद करते थे और अछूत की प्रथा को खत्म करने के आंदोलन में हिस्सा लिया करते थे।

उन्होंने कहा कि 1984 के दंगों के बाद उनके कॅरियर पर विराम लग गया जिसके बाद कुमार ''सार्वजनिक जीवन से दूर होते गए और परदे के पीछे से पार्टी के लिए काम करते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क गए।

दंगों के 34 वर्ष बाद 17 दिसम्बर को अदालत ने कुमार को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कुछ समय के बाद कुमार फिर से सक्रिय राजनीति में लौटे और 1991 तथा 2004 के लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की।

1984 के सिख विरोधी दंगे में कुमार को सजा होने से उनके कॅरियर पर पूरी तरह विराम लग गया और सोमवार को उन्होंने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। ऑस्ट्रेलिया में नए साल का आगाज हो चुका है। सिडनी में लोगों ने नए साल का स्वागत जमकर आतिशबाजी के साथ की।

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