विभाजन में पाक गए व्यक्ति की संपत्ति फर्जी वसीयत से हड़पने में आरोप में केस
राजपुर रोड के किशनपुर में करोड़ों की संपत्ति को जाली दस्तावेजों, फर्जी वसीयत और खानदानी शजरे के जरिए हड़पने का मामला सामने आया है। पीड़ित राजेश माकिन ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है। आरोप है कि आरोपी ने सरकारी रिकॉर्ड से दस्तावेज चुराकर संपत्ति का हड़प लिया।

पॉश इलाके राजपुर रोड स्थित किशनपुर में करोड़ों की संपत्ति को जाली दस्तावेजों, फर्जी वसीयत और फर्जी खानदानी शजरे के जरिए हड़पने का मामला सामने आया है। आरोप है कि देश के विभाजन के समय पाकिस्तान जा चुके एक व्यक्ति को अपना पारिवारिक सदस्य बताकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया। इतना ही नहीं सरकारी रिकॉर्ड रूम से अहम दस्तावेज भी चोरी कराए गए। मामले में पीड़ित राजेश माकिन की शिकायत पर राजपुर थाना पुलिस ने गुरुवार को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जेश माकिन निवासी राजपुर रोड के चाचा स्व. रोशन लाल माकिन ने 12 जुलाई 1957 को भारत सरकार से राजपुर रोड स्थित संपत्ति संख्या 175 खरीदी थी।
यह सरकार से घोषित निष्क्रांत संपत्ति थी। रोशन लाल के निधन के बाद उनकी वसीयत के आधार पर यह संपत्ति राजेश माकिन और उनके परिवार विनीता, विनय, रमेश, राजेंद्र व अन्य के नाम आ गई। बाद में वर्ष 2019 में परिवार ने यह संपत्ति अन्य लोगों को बेच दी जो वर्तमान में वहां काबिज हैं। आरोप है कि बिजनौर निवासी युनूस बेग और उसके बेटे आबिद बेग ने राजस्व विभाग के खाता खतौनी में फर्जी प्रविष्टि कर अपना नाम दर्ज करा लिया। फोरेंसिक जांच में यह प्रविष्टि पहले ही फर्जी साबित हो चुकी है। इस फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए साल 2015 में जिलाधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से खतौनी ही गायब कर दी गई। जिसका मुकदमा शहर कोतवाली में वर्ष 2015 में दर्ज हुआ था। संपत्ति हड़पने के लिए आरोपी आबिद बेग ने अब्दुल रहमान बारी नाम के व्यक्ति की 22 जून 1947 की एक उर्दू वसीयत कोर्ट में पेश कर दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक अब्दुल रहमान बारी 1947 में ही पाकिस्तान चला गया था और उसकी संपत्ति सरकार ने अधिग्रहित कर ली थी। जांच में सामने आया कि जिस स्टाम्प पेपर पर यह वसीयत बनाई गई है, वह दरअसल एक किरायेनामे के लिए खरीदा गया था। खुद को इस संपत्ति का असली वारिस साबित करने के लिए आरोपी आबिद ने मदरसा फैजुलउलूम नगीना, बिजनौर और नगर पालिका परिषद नगीना से प्रमाणित एक खानदानी शजरा पेश किया। जब राजेश माकिन के चचेरे भाई स्व. रमेश माकिन ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो मदरसा और नगर पालिका दोनों ने लिखित में दिया कि उन्होंने ऐसा कोई भी शजरा प्रमाणित नहीं किया गया है। दीवानी न्यायालय में पूर्व में चल रहे एक वाद के दौरान आरोपी आबिद बेग ने अपनी गलती मानते हुए माकिन परिवार से समझौता कर लिया था। रमेश माकिन के निधन के बाद उसने वर्ष 2022 में फिर से मुकदमा दायर कर दिया। अब उसने गौरव कुमार नाम के एक अन्य व्यक्ति को फर्जी पावर ऑफ आटर्नी देकर नए खरीदारों और माकिन परिवार के खिलाफ कई वाद दायर कर दिए हैं। एसओ राजपुर पीडी भट्ट ने बताया कि आरोपी आबिद बेग के खिलाफ फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाकर धोखधड़ी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
लेखक के बारे में
Ankit Kumar Chaudharyशॉर्ट बायो : अंकित कुमार चौधरी पिछले 15 वर्षों से मुख्यधारा की पत्रकारिता में विश्वसनीय और अनुभवी नाम हैं। वर्तमान में वह HT Group के दैनिक हिन्दुस्तान में देहरादून में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं।
परिचय एवं अनुभव:
अंकित चौधरी उत्तराखंड की क्राइम रिपोर्टिंग में एक प्रतिष्ठित नाम है। वर्ष 2011 में देहरादून से प्रत्रकारिता की शुरुआत की। अंकित ने क्राइम, कोर्ट, सीबीआई, जिला प्रशासन और रक्षा (डिफेंस) जैसे चुनौतीपूर्ण और गंभीर बीट्स पर अपनी विशेष पहचान बनाई है। पत्रकारिता के प्रति उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है। वे केवल समाचार रिपोर्ट नहीं करते, बल्कि उन 'ऑफबीट' और मानवीय संवेदनाओं वाली कहानियों को खोजने में विश्वास रखते हैं जो अक्सर मुख्यधारा की सुर्खियों से दूर रह जाती हैं।
कॅरियर का सफर
अंकित ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2011 में 'हिन्दुस्तान' के साथ बतौर रिपोर्टर की थी, जहां उन्होंने शुरुआती दौर में परिवहन और मंडी जैसी बीट से मुख्यधारा की पत्रकारिता में कदम रखा। इसके बाद 2013 से 2014 तक 'अमर उजाला' में रहते हुए उन्होंने क्राइम रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं। 2014-15 में 'आईनेक्स्ट' (दैनिक जागरण समूह के दैनिक बाइलिंगुअल ) में सब-एडिटर के रूप में डेस्क और फील्ड का अनुभव लेने के बाद मई 2015 में पुनः 'हिन्दुस्तान' से जुड़े। पिछले नौ वर्षों से वे इसी संस्थान में अपराध,सीबीआई, कोर्ट, ईडी, विजिलेंस, जेल, डिफेंस फोर्सेस और प्रशासन जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अंकित ने पश्चिमी यूपी से स्कूलिंग के बाद देहरादून से बीबीएस की डिग्री ली। इसके बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है और वर्ष 2022 में रक्षा मंत्रालय के प्रतिष्ठित 'डिफेंस कॉरेस्पोंडेंट कोर्स' को किया है। उनका पेशेवर सफर अमर उजाला और आईनेक्स्ट जैसे संस्थानों से होकर गुजरा है, जिससे उन्हें जमीनी रिपोर्टिंग और संपादकीय बारीकियों की गहरी समझ मिली है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अपराध रिपोर्टिंग
बीबीए और मास कम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा होने के कारण अंकित मैनेजमेंट और पत्रकारिता का संयोजन हैं। पश्चिमी यूपी मूल के चलते अपराध की समझ भी बेहतर है। इसी वजह से बीट पर कमांड होने के साथ एक्सपर्ट वेरिफाइड और रिसर्च-ड्रिवेन स्टोरियां लिख रहे हैं
एंटरटेनमेंट और विजन
अंकित का मानना है कि आधुनिक युग में तकनीकी पकड़ के साथ रिपोर्टिंग के विषयों की बुनियादी समझ होना जरुरी है। अपने व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच, अंकित स्वास्थ्य और फिटनेस को प्राथमिकता देते हैं। सुबह व्यायाम करना पसंद है। उन्हें यात्रा करना और खाली समय में पुस्तकें पढ़ना पसंद है। क्रिकेट खेलना और देखना पसंद करते हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम, कोर्ट, सीबीआई, ईडी, सेना और स्थानीय मुद्दों की रिपोर्टिंग के साथ एक्सप्लेनर रिपोर्टिंग।
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