चातुर्मास 25 से, रूक जाएंगे मांगलिक कार्यक्रम
श्रावण मास की फुहारों के साथ चातुर्मास का शुभारंभ 25 जुलाई से होगा और यह 20 नवबंर तक चलेगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। यह समय आत्मसंयम, पवित्रता और ईश्वर भक्ति को प्राथमिकता देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्रावण मास की फुहारों के साथ आध्यात्मिक जीवन का सबसे अनुशासित और पावन काल दस्तक देने जा रहा है। 25 जुलाई से चातुर्मास का शुभारंभ होगा, जो 20 नवबंर को देवात्थान एकादशी तक चलेगा। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक इस चार माह की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यवसाय जैसे मांगलिक कार्यों पर स्वाभाविक विराम लग जाएगा। पंडित सुशील पाठक ने बताया कि चातुर्मास सिर्फ पंचांग का धार्मिक काल नहीं, आत्मसंयम, प्रकृति के साथ सामंजस्य और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है। इस अवधि में संयमित जीवन, इंद्रियों पर नियंत्रण, सात्विक आहार और ईश्वर भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव पर मानी जाती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवप्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागृत होने के साथ ही पुन: मांगलिक कार्य आरंभ होते हैं। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह समेत अन्य सभी शुभ व मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, दान और सेवा का पुण्य कई गुना अधिक प्राप्त होता है।


