राजकीय संप्रेक्षण गृह में किशोरों को बांटी गईं पुस्तकें
राजकीय संप्रेक्षण गृह में मेरा वजूद फाउंडेशन द्वारा 'संस्कारशाला जीवन का आधार' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने किशोरों को नैतिक मूल्यों और उत्तम संस्कारों की सीख दी। सत्र में शिक्षकों ने बच्चों को प्रेरित किया और ज्ञानवर्धन के लिए पुस्तकें वितरित कीं। इन कार्यक्रमों से किशोरों का मानसिक और नैतिक विकास होगा।

राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में सोमवार को मेरा वजूद फाउंडेशन के तत्वाधान में संस्कारशाला जीवन का आधार कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों व विशेषज्ञों ने बाल गृह में निरुद्ध किशोरों को नैतिक मूल्यों और उत्तम संस्कारों को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाने की सीख दी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पहुंचे फाउंडेशन के वरिष्ठ सदस्य साहित्यकार डॉ. अ. कीर्ति वर्धन और संस्कारशाला के शिक्षक मनीष अरोड़ा ने किशोरों का उचित मार्गदर्शन किया। शिक्षक मनीष अरोड़ा ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कार ही वास्तव में किसी भी व्यक्ति के सच्चे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
उन्होंने आगे जोड़ा कि सत्य, अनुशासन, सेवा, करुणा, सम्मान, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे बुनियादी मूल्य ही बच्चों को भविष्य में एक श्रेष्ठ नागरिक बनने की सही दिशा प्रदान करते हैं। वहीं, डॉ. अ. कीर्ति वर्धन ने किशोरों को कहा कि जीवन में उत्तम संस्कारों को अपनाकर ही समाज में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने किशोरों की शिक्षा और ज्ञानवर्धन के लिए पुस्तकें भी वितरित कीं। संप्रेक्षण गृह में निरुद्ध किशोरों ने इन विचारों को न सिर्फ ध्यानपूर्वक सुना और समझा, बल्कि स्वयं भी अपने विचार खुलकर साझा किए। कार्यक्रम के दौरान किशोरों को संयम बरतने और समाज की मुख्यधारा से वापस जोड़ने को लेकर सार्थक विचार-विमर्श किया गया। आयोजन के समापन पर संस्था प्रभारी मोहित कुमार ने मेरा वजूद फाउंडेशन की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने फाउंडेशन से निवेदन किया कि संस्था में हर माह इस तरह के प्रेरक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि यहाँ रह रहे किशोरों को लगातार उच्च संस्कार मिलते रहें और उनका मानसिक व नैतिक विकास हो सके। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के कर्मचारी प्रदीप कुमार, विपिन कुमार और सुरजीत कुमार का विशेष सहयोग रहा।--
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