लाल आतंक का बड़ा चेहरा रहा रविंद्र गंझू,गिरफ्तारी के साथ एक दौर का अंत लुकुइया कांड से राष्ट्रीय स्तर पर रविंद्र की हुई चर्चा गृह मंत्रालय ने दिए थे एनआईए जांच के आदेश मनीष उपाध्याय
झारखंड के लातेहार जिले में माओवादी रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता है। पिछले 15 वर्षों में कई हमलों और अपराधों में शामिल रहा, वह एक साधारण कैडर से सब-जोनल कमांडर बना। 2019 के लुकुइया पुलिस हमले ने उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किया।

लातेहार संवाददाता। झारखंड के नक्सल इतिहास में पिछले डेढ़ दशक के दौरान जिन नामों ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती खड़ी की, उनमें चंदवा थाना क्षेत्र के लाधुप पंचायत स्थित बांझी टोला निवासी माओवादी रविंद्र गंझू प्रमुख रहा। संगठन में एक साधारण कैडर के रूप में शुरुआत करने वाला रविंद्र अपने काम, संगठनात्मक पकड़ और रणनीतिक भूमिका के दम पर सब-जोनल कमांडर तक पहुंचा। लातेहार, चतरा, पलामू, लोहरदगा और आसपास के इलाकों में रेलवे परियोजनाओं पर हमले, लेवी वसूली, आगजनी और सुरक्षा बलों पर हमलों जैसे कई चर्चित मामलों में उसका नाम सामने आया। हालांकि वर्ष 2019 के लुकुइया पुलिस हमला उसके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
इसी घटना के बाद उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया, मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तक पहुंचा और उसके पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। अब उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं।


