एसआईआर के नाम पर हो रही लोकतंत्र से छेड़छाड़ : कुरैशी
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मतदान संवैधानिक अधिकार है, और चुनाव आयोग ने मतदाताओं के जीवन को मुश्किल बना दिया है। बंगाल में 27 लाख मतदाता वोट नहीं दे सके, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी निराशा व्यक्त की।

नई दिल्ली, एजेंसी। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर सवाल उठाए। दावा किया कि इस प्रक्रिया के पीछे नीयत ठीक नहीं है। कथित तौर पर करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जाने को उन्होंने ‘लोकतंत्र से छेड़छाड़’ करार दिया। एक साक्षात्कार में कुरैशी ने कहा कि मतदान संवैधानिक अधिकार है, चुनाव आयोग से मिलने वाली कोई खैरात नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के जरिये मतदाताओं के जीवन को मुश्किल बना दिया है। नाम हट जाने से 27 लाख मतदाता बंगाल में वोट नहीं दे सके, जिसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ा। कुरैशी ने यह भी कहा कि इस मामले में नागरिकों का बचाव नहीं कर सुप्रीम कोर्ट ने भी हमें निराश किया。
मेरी दरियादिली का भाजपा को लाभ हुआ
कुरैशी ने कहा कि सत्ता से बाहर रहने वाले दलों को समान अवसर देने के लिए अधिक संस्थागत समर्थन की जरूरत होती है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग ने विपक्ष के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाया। उन्होंने कहा, ‘मैंने सभी अधिकारियों से कहा था कि विपक्ष की बात सुनें। मेरी इस दरियादिली का सबसे अधिक लाभ मुख्य विपक्षी दल भाजपा को मिला।’ कुरैशी ने दावा किया कि उस दौरान शुरुआत में उनके विरोधी रहे भाजपा नेता बाद में उनके प्रशंसक बन गए थे।
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