एफपीआई ने तीन दिन में 5,109 करोड़ रुपये निकाले
वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने तीन दिन में सरकारी प्रतिभूतियों से लगभग 5,109.21 करोड़ रुपये निकाले हैं। अमेरिकी-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय सरकारी बॉण्ड को कम आकर्षक बनाया। डेटा के अनुसार, 3,66,806.286 करोड़ रुपये तक का एफपीआई निवेश घटकर 3,66,791.286 करोड़ रुपये रह गया।

मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अनिश्चितता के कारण धारणा कमजोर होने के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले तीन दिन में पूर्ण पहुंच मार्ग के तहत सरकारी प्रतिभूतियों से लगभग 5,109.21 करोड़ रुपये निकाले हैं। एफएआर के तहत पात्र विदेशी निवेशकों को बिना किसी सीमा के कुछ खास सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने की अनुमति होती है। भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड के अनुसार, एफएआर के तहत सरकारी प्रतिभौतियों में एफपीआई निवेश 15 सितंबर को 3,66,806.286 करोड़ रुपये रहा, जबकि नौ सितंबर को यह 3,71,915.496 करोड़ रुपये था। आंकड़ों से पता चलता है कि यह निवेश 10 सितंबर को 3,71,520.751 करोड़ रुपये और 11 सितंबर को 3,66,791.286 करोड़ रुपये था。
अमेरिका-ईरान युद्ध की स्थिति
अमेरिका-ईरान युद्ध की बिगड़ती स्थिति के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें (जो 110 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं), अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल का पांच प्रतिशत के करीब पहुंचना और रुपये पर लगातार दबाव ने भारतीय सरकारी बॉण्ड को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, क्योंकि सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट' पाइपलाइन पर हमलों के बाद वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉण्ड में भारी बिकवाली के चलते मानक 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट का प्रतिफल सोमवार को 2023 के बाद पहली बार पांच प्रतिशत को पार कर गया।


