आईपीओ में बड़े बिकवाल रहे एफपीआई
नई दिल्ली, एजेंसी। आईपीओ में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) प्रारंभिक दौर में बड़े निवेशक रहे, लेकिन बाद में बड़े बिकवाल बन गए। सेबी के अध्ययन में आईपीओ शेयरों की कीमतों पर बिकवाली का नकारात्मक असर और लॉक-इन अवधि के अंत की जानकारी दी गई।

नई दिल्ली, एजेंसी। शुरुआती चरण में आईपीओ में बड़े निवेशकों के तौर पर पैसा लगाने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) बाद में सबसे बड़े बिकवाल रहे हैं। सेबी के एक अध्ययन के अनुसार, बड़े निवेशकों की भारी बिकवाली से 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने के आसपास आईपीओ शेयरों की कीमतों पर तेज दबाव देखा गया। मौजूदा नियमों के तहत एंकर निवेशकों को आवंटित शेयरों में 50 फीसदी पर 90 दिन और बाकी 50 फीसदी पर 30 दिन का लॉक-इन रहता है। यानी इस अवधि तक निवेशक अपने आवंटित शेयर नहीं बेच सकते। सेबी के अध्ययन में अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सूचीबद्ध 242 मेनबोर्ड आईपीओ को शामिल किया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि छोटे आईपीओ में बड़े निवेशकों ने ज्यादा निकासी की。
आईपीओ में 3.5 फीसदी तक गिरावट
अध्यन के अनुसार, जिन आईपीओ में एंकर निवेशकों ने अपनी 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी बेच दी, उनमें टी 29 से टी 33 यानी लॉक-इन खत्म होने के आसपास शेयरों की कीमत पर औसतन 3.5 फीसदी का नकारात्मक असर पड़ा। मध्यिका के आधार पर गिरावट और ज्यादा रही। इस दौरान शेयर कीमतों में करीब 6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। कीमतों में बदलाव का इंटरक्वार्टाइल दायरा भी मुख्य रूप से नकारात्मक रहा। सबसे ज्यादा बिकवाली वाली इस श्रेणी में एफपीआई ने अपने बड़े आवंटन में औसतन 24.5 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी। इसके बाद कॉरपोरेट 23.1 फीसदी और अन्य योग्य संस्थागत खरीदार (अन्य क्यूआईबी) 21.6 फीसदी पर रहे।
जितनी ज्यादा बिकवाली, उतना ज्यादा दबाव
सेबी के अध्ययन में पाया गया कि बड़े निवेशकों की बिकवाली बढ़ने के साथ आईपीओ शेयरों की कीमतों पर दबाव भी बढ़ता गया। जिन आईपीओ में एंकर निवेशकों ने 2.5 से 10 फीसदी हिस्सेदारी बेची, वहां कीमतों पर करीब 1.3 फीसदी का नकारात्मक असर पड़ा। वहीं, जिन आईपीओ में निकासी 2.5 फीसदी तक रही, उनमें कीमतों पर असर करीब 0.4 फीसदी नकारात्मक रहा। हालांकि, 90 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने के बाद कीमतों पर यह दबाव काफी हद तक कम हो गया। निकासी की तीव्रता वाली तीनों श्रेणियों में उस समय औसत और मध्यिका कीमत बदलाव करीब शून्य रहा।


