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लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Nootan Vaindel
Sat, 01 May 2021 11:07 AM
ऑक्सीजन, वैक्सीन और रेमडेसिविर...कोरोना संकट में ऐसे काम कर रहा विदेश मंत्रालय

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने भारत में ऐसा तबाही मचाई है कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था वायरस के झुकती नजर आ रही है। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ी जा रही इस लड़ाई में भारत को विदेशों से मदद मुहैया कराइ जा रही है। विदेश मंत्रालय साफ कर चुका है कि महामारी के खिलाफ लड़ी जा रही इस लड़ाई में उसका उद्देश्य ऑक्सीजन, वैक्सीन और रेमडेसिविर प्राप्त करना है। विदेश मंत्रालय लगातार इन सभी मेडिकल सप्लाई को प्राप्त करने में लगा है।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर सिंगापुर और थाइलैंड के अपने समकक्षों को कॉलकर के शनिवार को निजी रूप से धन्यवाद देंगे। बताया गया है कि कोरोना वायरस से लड़ी जा रही लड़ाई में भारत की मदद करने के लिए दोनों नेताओं को ध्न्यवाद किया जाएगा। इसके साथ ही विदेश मंत्री ने सभी भारतीय दूतावासों को मेडिकल सप्लाई जुटाने के ले निर्देश दिए गए हैं।

मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, जयशंकर ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ वर्चुअल मीटिंग की जिसमें भारत के लिए मेडिकल सप्लाई के रूप में दी गई मदद की विदेश मंत्री ने सराहना की। मोदी सरकार ने संकट के समय में भारत को ऑक्सीजन टैंकरों के आपूर्तिकर्ता के रूप में थाईलैंड द्वारा निभाई गई उसकी भूमिका की भी सराहना की है।

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और चीनी राज्य पार्षद और विदेश मंत्री वांग यी के साथ आभासी बैठक होने से पहले ही, जयशंकर ने गुरुवार को भारत के सभी अभियानों के प्रमुखों को बताया कि उनका उद्देश्य भारत में ऑक्सीजन, वैक्सीन और रेमडेसिविर प्राप्त करना है। जबकि ईएएम ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि भारत की वैक्सीन मैत्री ने देश के लिए बहुत सद्भावना उत्पन्न की है, इसलिए समय आ गया है कि सभी देश इस कठिन समय में भारत की भी मदद करने सामने आएं।

जयशंकर की ब्लिंकन के साथ मुलाकात बहुत ही फलदायी रही। अमेरिकी सचिव ने कहा कि कोरोना महामारी के साथ लड़ी जा रही लड़ाई में अमेरिका भारत के साथ खड़ा है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अपनी बातचीत के दौरान, जयशंकर ने चीन से अनुरोध किया कि गैर-बाजार बाधाओं को उठाए और भारत के लिए माल प्रवाह की अनुमति देने के साथ-साथ विशेष उड़ानों के माध्यम से खाली करने वाले उपकरणों को मंजूरी दे। इस पर चीन की लिखित प्रतिक्रिया का इंतजार है।

 

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