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संसदीय इतिहास में पहली बार, NCP सांसद की दो बार गई सदस्यता; फिर से बहाली

संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि सालभर के अंदर ही किसी सांसद की सदस्यता दो बार चली गई हो और दोनों बार फिर से बहाल कर दी गई हो। एनसीपी सांसद मोहम्मद फैसल के साथ ऐसा हुआ।

संसदीय इतिहास में पहली बार, NCP सांसद की दो बार गई सदस्यता; फिर से बहाली
Ankit Ojhaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीFri, 03 Nov 2023 09:33 AM
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सांसद मोहम्मद फैजल पीपी की अयोग्यता का फैसला रद्द करते हुए उनकी एक बार फिर लोकसभा सदस्यता बहाल कर दी गई है। बता दें की सालभर में ही दो बार उनकी सांसदी गई और दो बार फिर से बहाल कर दी गई। लोकसभा सचिवालय की तरफ से नोटिफिकेशन जारी करके उनकी सदस्यता को बहाल कर दिया गया। बता दें कि  सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी है। इससे पहले 4 अक्टूबर को उन्हें दूसरी  बार अयोग्य घोषित कर दिया था। केरल हाई कोर्ट ने 2009 केएक मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बता दें कि फैजल लक्षद्वीप से सांसद हैं। संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सालभर के भीतर ही किसी सांसद की सदस्यता दो बार छीनी गई और दो बाहर बहाल भी की गई हो। 

एनसीपी सांसद की सदस्यता बहाल होने पर सुप्रिया सुले ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को धन्यवाद दिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उनकी सदस्या लौटाए जाने पर वह बेहद खुश हैं। संविधान जयते की बात कहते हुए सुले ने कहा कि अब उन्होंने एक बार फिर राहत की सांस ली है। बता दें कि 1 नवंबर को लक्षद्वीप स्थापना दिवस के मौके पर सुप्रिया सुले ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए लोकसभा स्पीकर से फैजल की सदस्या लौटाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को 23 दिन हो गए हैं। अब तक मोहम्मद फैजल की सदस्यता पर फैसला नहीं किया गया है। इस तरह से देरी करके लक्षद्वीप की जनता के साथ नाइंसाफी की जा रही है। 

बता दें कि कावारत्ती की एक अदालत ने फैजल को 10 साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद 11 जनवरी को उन्हें पहली बार अयोग्य घोषित कर दिया गया। एनसीपी नेता फैजल 2014 और 2019 में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। अब लोकसभा की तरफ से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उनकी अयोग्यता का फैसला रद्द किया जाता है। बाकी आदेश आगे के कोर्ट फैसलों के अनुसार होगा। 

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