बिना आधार सौ फीसद नेचुरल-आर्गेनिक प्रचार किया तो लगेगा दस लाख जुर्माना
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैज्ञानिक आधार के भ्रामक दावे करना मिस-ब्रांडिंग माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सहायक आयुक्त ने खाद्य निर्माण इकाइयों को नए अनुपालन नियमों के तहत जानकारी दी। सभी निर्माताओं के लिए रोजाना उत्पादन का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई खाद्य निर्माता वैज्ञानिक आधार के बिना अपने उत्पाद के पैकेजिंग पर सौ प्रतिशत प्योर, नाइसर, ऑर्गेनिक या आयुर्वेदिक जैसे भ्रामक दावे करता है, तो इसे मिस-ब्रांडिंग का अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज होगा और तीन लाख रुपये तक के जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, भ्रामक प्रचार करने पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। सोमवार को सिंधु नगर (कृष्णा नगर) स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और प्रमाणन (एफओएसटीएसी) के तहत एडवांस ट्रेनिंग फॉर मैन्युफैक्चरर कार्यक्रम में सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय विजय प्रताप सिंह ने खाद्य निर्माण इकाइयों के प्रतिनिधियों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2006 के तहत लागू नए अनुपालन नियमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 24 जून 2026 के संशोधनों के तहत अब सभी निर्माताओं के लिए कच्चे माल की खरीद, दैनिक उत्पादन और स्टॉक का डेली मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। कार्यक्रम में सरोजनीनगर, नादरगंज और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) से जुड़े 150 खाद्य निर्माण इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
नियमों की प्रमुख बातें
दो बार एनएबीएल लैब से उत्पादों की जांच करवाकर एफओएससीओएस पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य
जल परीक्षण व री-पैकेजिंग के तहत हर साल जल परीक्षण रिपोर्ट जमा करनी होगी
री-पैकेजिंग करने वाली इकाइयों को मूल निर्माता का विवरण अंकित करना होगा
न्यूट्रिशन लेबलिंग में पोषण लेबल पर नमक, चीनी और फैट की मात्रा को स्पष्ट व बोल्ड अक्षरों में दिखाना होगा


