खाद्य महंगाई, कमजोर और असमान मानसून बन रहा चुनौतीः रिपोर्ट
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। आर्थिक सुधार के बीच खाद्य महंगाई बनी चिंता। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य महंगाई, कमजोर मानसून, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार में प्रतिबंधों का जोखिम बना है। प्याज और लहसुन की महंगाई में तेजी आई है। कृषि क्षेत्र में मानसून की स्थिति चिंता का विषय है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। आर्थिक सुधार के बीच अर्थव्यवस्था के लिए खाद्य महंगाई बनी बड़ी चिंता बनी हुई है। कारण कुछ वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी अगस्त की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य महंगाई, कमजोर और असमान मानसून, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार में बढ़ते प्रतिबंधों को लेकर जोखिम बना हुआ है। रिपोर्ट कहती है कि खुदरा महंगाई मामूली बढ़कर 4.45 फीसदी हो गई, जबकि जून में 4.38 फीसदी थी। खाद्य महंगाई 5.52 फीसदी रही। वहीं थोक महंगाई जून के 9.87 फीसदी से घटकर जुलाई में 9.78 फीसदी हुई। प्याज और लहसुन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। जुलाई में प्याज की महंगाई 22 फीसदी और लहसुन की 35 फीसदी रही। दूसरी टमाटर की कीमतों में 4 फीसदी की गिरावट आई। खाद्य तेल भी चिंता का कारण बना हुआ है। भारत खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। वैश्विक स्तर पर पाम, सोयाबीन और रेपसीड तेल का इस्तेमाल जैव ईंधन बनाने में बढ़ने से उपलब्धता पर दबाव पड़ा है। भारत में खाद्य तेल की महंगाई मार्च के 2.82 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 7.84 फीसदी हो गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार जुलाई में मजबूत बनी रही। घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधि और रोजगार बाजार ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है.
व्हाइट-कॉलर नौकरियों में सुधार
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि व्हाइट-कॉलर नौकरियों में भी सुधार देखने को मिला। जुलाई के दौरान भर्ती में सालाना आधार पर पांच फीसदी वृद्धि हुई। आईटी भर्ती छह फीसदी और एआई/एमएल से जुड़े रोजगार में 33 फीसदी की तेज वृद्धि हुई। फ्रेशर्स की भर्ती भी छह फीसदी बढ़ी। गैर-आईटी क्षेत्र में बीमा क्षेत्र की भर्ती 10 फीसदी, रियल एस्टेट आठ फीसदी और स्वास्थ्य क्षेत्र में छह फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मानसून को लेकर चिंताए बरकरार
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। 21 अगस्त तक खरीफ फसलों की बुवाई 1,056.7 लाख हेक्टेयर रही, जो बीते साल की समान अवधि से करीब 1.5 फीसदी कम है। हालांकि बारिश में सुधार से बुआई को गति मिली है। रिपोर्ट में अल नीनो को बड़ा जोखिम बताया गया है। जुलाई में अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी थी और अगस्त से मार्च 2027 तक इसके प्रमुख चरण बने रहने की 80-98 फीसदी संभावना जताई गई है। इससे मानसून, फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.


