अवैध कॉलोनियों बन सकती हैं एफएनजी में बाधा
फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) परियोजना में तीन दशकों से अवैध कॉलोनियों की समस्या सामने आई है। लगभग 50 हजार लोग इन कॉलोनियों में बस चुके हैं, जिन्हें हटाना मुश्किल होगा। एफएनजी परियोजना के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार है, ताकि अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सके।

फरीदाबाद, धनंजय चौहान। स्मार्ट सिटी में तीन दशक से अटकी फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) परियोजना के मार्ग में अवैध कॉलोनियां नई चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। ऐसे में ये कॉलोनियां परियोजना में बढ़ी बाधा बन सकती हैं। जिन्हें बाद में हटाना प्रशासन के लिए काफी मुश्किल हो सकता है। स्मार्ट सिटी से रोजाना करीब करीब एक लाख लाेग नौकरी व अन्य कामों के लिए नोएडा और गाजियाबाद रोजाना आते-जाते है। वहीं नोएडा-फरीदाबाद के बीच यमुना नदी है। इस कारण दो राज्यों के बीच अभी कोई सीधी सड़क नहीं है। लोगों को सड़क मार्ग से नोएडा जोने के लिए कालिंदीकुंज होकर जाना पड़ता है। जहां दिनभर भारी जाम लगता है। लोगों का 10 मिनट का सफर एक घंटे में पूरा होता है। वहीं दिल्ली की तरफ से नोएडा जाने पर घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ता है। इससे लोगों के पसीने छूट जाते हैं। मेट्रो से जाने पर करीब दो घंटे का समय लगता है, जिससे लोगों को काफी समस्या होती है। एफएनजी परियोजना के सिरे चढ़ने पर दो राज्यों के बीच की दूरी मिनटों में सिमिट जाएगी। प्रोजेक्ट को हरियाणा सरकार ने अपने फ्लैगशिप प्रोजेक्ट में शामिल किया हुआ है। लोक निर्माण विभाग की ओर से परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए दो अलाइंमेंट मंजूरी के लिए दो साल से सरकार को भेजी हुई हैं, जिसमें लालपुर गांव के पास यमुना पर 600 मीटर लंबा पुल प्रस्तावित है। सेक्टर-87 स्थित निजी अस्पताल के पास रिवाजपुर और टिकावली होते हुए यमुना पर प्रस्तावित पुल तक नौ किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। वहीं एक अन्य मार्ग मंझावली सड़क से जाेड़ा जाएगा। इसे लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल कई बार घोषणा कर चुके हैं कि अलाइमेंट को जल्द मंजूरी दी जाएगी। लेकिन लोक निर्माण विभाग को दावा है कि अब तक मंजूरी पत्र नहीं मिला। पिछले पांच से सात सालों में दो प्रस्तावित मार्गों के बीच 10 से अधिक कॉलोनियां बस चुकी हैं। इनमें 50 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। इन्हें हटाने विभाग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है。
अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कई बार हो चुका मंथन
एफएनजी परियोजना के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, लोक निर्माण विभाग जमीन की नपती शुरू करेगा और अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया तेज होगी। इसके लिए उपायुक्त ने कई बार नगर निगम सहित अन्य विभागों के साथ बैठक की जाएगी, कब्जे हजाने को लेकर मंथन भी हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य पूरी तरह से नियमानुसार किया जाएगा, जिससे प्रभावित लोगों को भी उचित समय और अवसर मिल सके।साथ ही जमीन अधिग्रहण करने पर पूरा मुआवजा दिया जाएगा।
ढाबे-पक्के मकान बने
पीडब्ल्यूडी के सर्वेक्षण में पाया गया है कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे रूट पर कई ढाबे और अस्थायी दुकानें हैं। इसके अलावा, कुछ स्थानों पर पक्के मकान भी मौजूद हैं, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है।
फाइल को अभी सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जमीन अधिग्रहण और अवैध कब्जों को भी हटाने का कार्य किया जाएगा।
-प्रकाश लाल, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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