घाटकुसुम्भा : 3 गांवों की 5 हजार आबादी बाढ़ से घिरी, तो ड्राम और लकड़ी से बनाई ‘जुगाड़ू नाव’
घाटकुसुम्भा के सहरा गांव में बाढ़ से गंभीर हालात पैदा हो गए हैं, जहाँ पानी से घिरे लोगों ने ड्राम और लकड़ी से जुगाड़ू नाव बनाई है। यह नाव उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचने में मदद कर रही है, जबकि अधिकारियों द्वारा राहत की तैयारियाँ अधूरी हैं। कई गांवों का संपर्क टूटने का खतरा बढ़ रहा है।

घाटकुसुम्भा : 3 गांवों की 5 हजार आबादी बाढ़ से घिरी, तो ड्राम और लकड़ी से बनाई ‘जुगाड़ू नाव’ पानी की कैद से उपजी अकुलाहट से बाहर निकलने का एकमात्र साधन बनी है जुगाड़ू नाव सहरा गांव में मंदिर, ट्रांसफॉर्मर व आंगनबाड़ी केंद्र पानी में डूबे बावघाट-पानापुर सड़क पर चढ़ा पानी, कई गांवों का संपर्क टूटने का मंडरा रहा खतरा गंगा के उफान से हरोहर नदी का का जलस्तर लाल निशान के पास फोटो घाटकुसुम्भा01 : घाटकुसुंभा के सहरा गांव में बाढ़ के पानी से घिरे मंदिर, ट्यूबवेल, ट्रांसफार्मर, आंगनबाड़ी केंद्र व घर। घाटकुसुम्भा02 : घाटकुसुंभा के सहरा में ड्राम व लकड़ी से बनी जुगाड़ू नाव से जरूरत का सामान ले जाते बाढ़ प्रभावित लोग। घाटकुसुम्भा03 : घाटकुसुम्भा के बावघाट-पानापुर सड़क पर चढ़ा पानी, जिससे मंडरा रहा कई गांवों का संपर्क टूटने का खतरा। घाटकुसुम्भा (शेखपुरा), निज संवाददाता। गंगा के जलस्तर में हुई बेतहाशा वृद्धि ने शेखपुरा जिले के घाटकुसुम्भा प्रखंड में बाढ़ के हालात गंभीर हो गये हैं।
बाढ़ के दुष्प्रभाव
सरकारी राहत और नाव उपलब्ध कराने के दावों के बीच सहरा गांव के ग्रामीण खुद अपनी जान बचाने को मजबूर हैं। पानी से घिरे घरों से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों ने खाली ड्राम और लकड़ी के फट्टों को बांधकर ‘जुगाड़ू नाव’ तैयार कर ली है। इसी के सहारे जान जोखिम में डालकर ग्रामीण अपने दैनिक इस्तेमाल का जरूरी सामान ढो रहे हैं। गांव बना टापू, बुनियादी सुविधाएं ठप: गंगा के उफान के कारण हरोहर (हरुहर) नदी का पानी उल्टी दिशा में तेजी से बह रहा है, जिससे सहरा गांव टापू में तब्दील हो गया है। गांव का मंदिर, ट्यूबवेल, आंगनबाड़ी केंद्र, बिजली ट्रांसफार्मर और सामुदायिक भवन पूरी तरह पानी से घिर चुके हैं। ग्रामीण सूरज कुमार, राधे महतो, रामानंदन महतो आदि के घरों के चारों तरफ पानी भर गया है। लोगों का घर से बाहर निकलना मुहाल हो गया है। सड़क पर चढ़ा पानी, संपर्क टूटने का डर: बाढ़ का दायरा लगातार खतरनाक रूप ले रहा है। बावघाट-पानापुर मुख्य सड़क के पुल के ऊपर से बाढ़ का पानी बहने लगा है। अगर जलस्तर में थोड़ी और वृद्धि हुई, तो इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो जाएगा। ऐसा होते ही कई गांवों का प्रखंड और जिला मुख्यालय से सीधा सड़क संपर्क कट जाएगा। हवा-हवाई साबित हो रहे दावे: एक दिन पहले ही डीएम समेत जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पानापुर इलाके का दौरा कर बाढ़ की तैयारियों का जायजा लिया था। उन्होंने सामुदायिक रसोई, पशु चारा, मेडिकल कैंप और नाव जैसी सुविधाएं दुरुस्त होने का दावा किया था। लेकिन, सहरा गांव में तैरती जुगाड़ू नाव प्रशासन की इन तैयारियों की पोल खोल रही है। कहते हैं अधिकारी: अकरपुर गांव में एक नाव उपलब्ध करा दी गई है। हालात पर हमारी नजर है। अगर पानी बढ़ता है और जरूरत पड़ती है, तो अगले दिन बावघाट में भी सरकारी नाव मुहैया करा दी जाएगी। राकेश कुमार, सीओ, घाटकुसुंभा, शेखपुरा


