गंगा के बढ़ते जलस्तर से ग्रामीण चिंतित, बाढ़ का खतरा
हरिद्वार और बिजनौर से छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा के जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जिससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। विकराल स्थिति उत्पन्न होने के बावजूद, गंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है। प्रशासन स्थिति की निगरानी कर रहा है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब गंगा के मैदानी इलाकों में दिखाई देने लगा है। हरिद्वार और बिजनौर से छोड़े जा रहे पानी के चलते राजघाट गंगा घाट और नरौरा बैराज पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में बाढ़ का खतरा और गहरा सकता है। खतरे का निशान 178.765 सेमी है जबकि मौजूदा समय में 178.29 सेमी गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड किया गया। गंगा के बढ़ते जलस्तर से रघुपुर पुख्ता, मेगरा, नरुपुरा, शालिग की मढ़ैया, मैदावली, तोतापुर, बझागी समेत कई तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ का सबसे अधिक असर जुनावई क्षेत्र के गांवों पर पड़ता है। ऐसे में जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी उनके लिए चिंता का कारण बन गई है। लोगों को आशंका है कि यदि पानी छोड़ने का सिलसिला जारी रहा तो गंगा किनारे कटान तेज हो सकता है और निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगेगा। नरौरा बैराज पर भी जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नहर विभाग के अनुसार शाम चार बजे तक बैराज पर करीब 1.62 लाख क्यूसेक पानी की उपलब्धता दर्ज की गई। जबकि डाउन स्ट्रीम में लगभग 1.47 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इसके अलावा निचली गंगा नहर और समानांतर निचली गंगा नहर में भी हजारों क्यूसेक पानी की निकासी जारी है。
अभी खतरे के निशान से नीचे है गंगा
गुन्नौर। हालांकि फिलहाल गंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए है। सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं तथा तटवर्ती गांवों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और तेज हुई तो आने वाले दिनों में बाढ़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
रघुपुर पुख्ता के नाले तक पहुंचा बाढ़ का पानी
जुनावई। जुनावई इलाके में गंगा नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर अब तटीय गांवों के लिए चिंता का कारण बन गया है। बांध के अंदर बसे गांव रघुपुर पुख्ता के दक्षिण दिशा में बहने वाले नाले तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पानी के तेजी से फैलाव से ग्रामीणों और किसानों में दहशत का माहौल है। आशंका जताई जा रही है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो कई और गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। बझांगी गांव में भी गंगा का पानी पहुंचने से देवेंद्र और रायबहादुर की पशुशालाओं में पानी घुस गया है। वहीं गांव के प्राथमिक विद्यालय के गलियारे में भी जलभराव हो गया है। इसके अलावा मेंगरा, उदिया नगला और तोतापुर के खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से धान और मक्का की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में भरा रहा तो गन्ने की फसल भी सड़कर नष्ट हो सकती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। बाढ़ के पानी से पशुओं के चारे का संकट भी गहराने लगा है। ग्रामीण अपने मवेशियों को चराने के लिए गहरे और गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। वहीं लंबे समय तक जलभराव बने रहने से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
लगातार क्षेत्र का भ्रमण किया जा रहा है और प्रशासन पूर्ण रूप से नजर बनाए हुए है। बाढ़ से निपटने के लिए पूर्ण तरीके से प्रशासन प्रयास कर रहा है। अभी इस तरह की कोई स्थिति नहीं है।
- अवधेश कुमार वर्मा, एसडीएम, गुन्नौर


