गंडक नदी में फिर बढा डिस्चार्ज, छितौनी बांध के संवेदनशील प्वाइंटों पर खतरा
नेपाल में बाढ़ के तीसरे दिन गंडक नदी का डिस्चार्ज 1 लाख 2 हजार 400 क्यूसेक तक पहुंच गया है, जिससे खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने अपील की है कि लोग नदी में बह रही लकड़ियों को न पकड़ें, लेकिन लोग जोखिम में जनहित के लिए नदी के आसपास सक्रिय हैं।

कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। नेपाल में आयी बाढ़ के तीसरे दिन गंडक नदी में पानी की डिस्चार्ज फिर से बढ़ने लगा है। पहले नदी का डिस्चार्ज 88 हजार क्यूसेक था, जो बढ़कर घटकर 1 लाख 2 हजार 400 क्यूसेक हो गया। इसका असर है कि नदी छितौनी बांध के भैंसहा गेज पर गंडक की जलस्तर चेतावनी बिन्दु 95 के सापेक्ष 30 सेमी ही नीचे रह गया है। डिस्चार्ज बढ़ने के बाद नदी छितौनी बांध के भेडियारी ठोकर नम्बर तीन के समीप दबाव बना रही है। इससे बंधे के संवेदनशील प्वाइंट्स पर खतरा बढ़ गया है।
बाढ़ के कारण और उपाय
यहां पूर्व में हुए कटान को बाढ खंड एसडीओ संजय गौंड की मौजूदगी युद्ध स्तर पर कार्य कराकर लगभग रोक दिया गया है। मालूम हो कि दो दिन पूर्व तिब्बत में ग्लेशियर फटने से नेपाल के त्रिशूली नदी में भारी मात्रा में पानी पहुंच गया था। जिससे नेपाल में बाढ़ आ गई। बाढ़ में दर्जनों गांव व सैकड़ों लोग पानी में बह गए। नेपाल में बाढ आने के बाद वाल्मीकि गंडक बैराज के सभी 36 फाटकों को ऊपर उठा लिया गया। जिससे नदी का पानी बड़ी गंडक नदी व बिहार की ओर जाने वाली अन्य नदियों में चला गया। बुधवार को गंडक में डिस्चार्ज बढ़ कर करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पहुंच गया था। अगले दिन डिस्चार्ज घटने लगा। गुरुवार को नदी में डिस्चार्ज घटने से खड्डा रेता क्षेत्र में बाढ़ का खतरा टल गया। जिससे प्रशासन सहित रेता क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली। बाढ़ खंड विभाग का दावा है कि इतने पानी के डिस्चार्ज से बाढ़ का खतरा नहीं है लेकिन नदी छितौनी तटबंध के संवेदनशील स्थानों पर दबाव बना रही है। बाढ़ खंड विभाग निगरानी में जुटा है।
जान जोखिम में डाल रहे लोग
प्रशासन की अपील का असर नहीं, जान जोखिम में डाल लकड़ियां पकड़ रहे लोग नेपाल से नदी में लकड़ी के साथ अन्य सामान बहकर आने से सिलसिला अभी थमा नहीं है। गुरुवार को तीन लाशें बहकर आयी थीं। शुक्रवार को भी तीन और लाशें मिलीं। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की थी कि तेज बहाव वाली नदी में बह रहे सामानों को पकड़ने के चक्कर में न जाएं। पुलिस व होमगार्ड जवानों को लगाकर ऐसे लोगों को सख्ती से रोकने के आदेश दिए गए थे ताकि किसी की जान को खतरा न हो। शुक्रवार को खड्डा व छितौनी इलाके में प्रशासन की अपील का कोई असर नहीं दिखा। तटबंध के आसपास गांव के लोग नदी में कह रही लकड़ियों व अन्य सामानों को पकड़ने के लिए अब भी जान जोखिम में डाल रहे हैं। छितौनी तटबंध के किमी 0 से लेकर 12.700 वीरभार ठोकर लकड़ियों से पटा हुआ है। जिससे नदी किनारे बसे गांव के लोग उसमें कमती सामान चुनने में लगे हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने नदी में बहकर आए सामानों को घर ले जाने पर रोक लगाई है।


