बारिश और बाढ़ से फसलें हुईं बर्बाद, तबाही का दिखा मंजर
चित्रकूट जिले में भारी बारिश के कारण खरीफ फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। मंदाकिनी नदी में बाढ़ ने सब्जी की बुआई को खराब कर दिया, जिससे किसानों को भारी चपत लगी है। तिल, अरहर, और उर्द जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि धान की फसल से कुछ उम्मीदें बरकरार हैं।

चित्रकूट। जिले में जोरदार बारिश के साथ नदी-नालों में उफान के दौरान खरीफ की फसलों को काफी क्षति हुई है। मंदाकिनी की बाढ़ में नदी किनारे तैयार सब्जी की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई है। जिससे किसानों को लंबी चपत लगी है। खेतों में बारिश का पानी भर जाने से सर्वाधिक तिल, अरहर, उर्द, मूंग आदि की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों की मानें तो केवल धान की फसल से ही अब उम्मीदें रह गई है। करीब एक सप्ताह तक रुक-रुककर मूसलाधार बारिश हुई है। जोरदार बारिश से मंदाकिनी, बरदहा के अलावा अन्य छोटे नाले भी उफान पर आ गए थे।
दो दिन पहले ही बारिश थमने के साथ नदी-नालों का जलस्तर कम हुआ है। फलस्वरुप अब बारिश और बाढ़ से फसलों को हुई क्षति का मंजर साफ नजर आने लगा है। मंदाकिनी नदी किनारे सीतापुर, डिलौरा, तरौंहा, कपसेठी, गोबरिया, मुख्यालय कर्वी आदि के काफी किसानों ने सब्जी की खेती तैयार की थी। भिंडी, तरोई, लौकी, कद्दू, बैगन आदि की फसलें लहलहा रही थी। लेकिन मंदाकिनी में आई बाढ़ के दौरान पूरी फसलें बर्बाद हो गई। सब्जी किसानों का कहना है कि बाढ़ सिमटने के बाद अब केवल डंठल ही नजर आ रहे है। उनकी मेहनत के साथ ही खाद-बीज का पूरा पैसा चला गया। इसी तरह ग्रामीण अंचलों में इस वर्ष जून-जुलाई में बारिश कम होने की वजह से ज्यादातर किसानों ने धान की फसल हो पाने की उम्मीदें छोंड दी थी। फलस्वरुप किसानों ने तिल, उर्द, मूंग, अरहर आदि की फसलें अधिक बोई। बारिश के अभाव में उस दौरान किसान धान की रोपाई कम कर पाए थे। खेतों में फसलें लहलहाने लगी थी। किसानों को उम्मीदें थी कि इस वर्ष तिल और अरहर की अच्छी पैदावार होगी। यही वजह है कि किसानों ने करीब 27 हजार हेक्टेयर में अरहर व 23 हजार हेक्टेयर रकबे में तिल की फसल बोई थी। लेकिन जोरदार बारिश होने से खेत लबालब हो गए और तिल की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई।


