गांव में भरा बाढ़ का पानी तो सिर से छत भी छिन गई
निघासन में शारदा नदी के बाढ़ के पानी ने कई गांवों के लोगों को बेघर कर दिया है। परिवार सड़क किनारे तिरपाल में रह रहे हैं, क्योंकि बाढ़ के कारण घरों में पानी भर गया है। गाँव के लोग रोजी-रोटी के संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनके खेत जलमग्न हैं।

निघासन। गांव में घुसे शारदा नदी के बाढ़ के पानी ने सिर से छत भी छीन ली। घर के भीतर से लेकर आसपास चारों तरफ पानी भर जाने से कई परिवार घर छोड़कर सड़क किनारे तिरपाल डालकर परिवार समेत पड़े हैं। उनके सिर की छत थी और अपनों के साथ सुकून से दो वक्त की रोटी भी बाढ़ ने छीन ली है। बाढ़ के पानी से भरे घर में खाना बनाने से लेकर तमाम असुविधाओं के अलावा रात-बिरात जहरीले कीड़े-मकोड़ों के डर से कस्बे के पड़ोस के मंझिलीपुरवा और बुद्धापुरवा गांवों के कई परिवार घर छोड़कर कुछ जरूरी सामान के साथ पचपेड़ी घाट रोड के किनारे आ गए हैं।
वे सड़क किनारे तिरपाल तानकर इसके नीचे दिन काटने को मजबूर हैं। किसी ने घर से जरूरी सामान लेकर ऊंची जगह ठिकाना बनाया है तो कोई आसपास अपने किसी रिश्तेदार के यहां रहकर गांव से पानी निकलने का इंतजार कर रहा है। शारदा नदी की बाढ़ के पानी ने निघासन तहसील के कई गांवों के बाशिंदों की करीब दस दिन से जिंदगी बेहाल कर रखी है। घर होते हुए भी वे बेघर जैसे हो गए हैं।दिन में धूप और रात में मच्छरों की फौज उनका जीना दुश्वार किए है। चारपाई और तख्त सोने के साथ-साथ रसोई भी बन गए हैं। कुछ लोग जो अभी भी हिम्मत दिखाते हुए घरों में ही डटे हैं, वे चारपाई या तख्त आदि पर चूल्हा जलाकर खाना बना रहे हैं। बाढ़ ने घरों को घेरने के साथ ही तमाम मजदूरीपेशा लोगों की रोजी-रोटी भी छीन ली है। खेत पानी में डूबे होने से मजदूरी का काम ठप है। रोज कमाने और खाने वालों के सामने दो वक्त की रोटी की चिंता खड़ी हो गई है। क्षेत्र के बरोठा, करमूपुरवा, बस्तीपुरवा, मंझलीपुरवा, बुद्धापुरवा, लोनियनपुरवा, बस्तीपुरवा आदि कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा है।


