पांच गांवों के एक हजार आबादी समेटने लगी गृहस्थी
फतेहपुर में गंगा के उफान और पांडू नदी के अलावा अन्य कारणों से पांच गावों में बाढ़ ने ग्रामीणों को समस्याओं में डाल दिया है। लगभग एक हजार लोग कटे रास्तों के कारण फंसे हुए हैं। खेती में भी नुकसान हो रहा है और प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है।
फतेहपुर। गंगा के लगातार रौद्र रूप में आने के चलते दोआबा के कटरी के ग्रामीणों की समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं। पांच गांव के मुख्य मार्गों पर बाढ़ का पानी भर जाने के कारण इनका संपर्क कट चुका है। नतीजतन इन गांव में रहने वाले करीब एक हजार ग्रामीणों के सामने समस्याएं खड़ी हो रही हैं। जिससे वह अपनी गृहस्थी समेटने में जुट गए हैं। वहीं गंगा के उफान पर आने के चलते ट्रैक्टर से गांव पहुंचकर अफसरों ने ग्रामीणों से मुलाकात कर राहत शिविर पहुंचने की अपील की। झोंपड़ी तक पहुंचा पानी
फसल और खेती में नुकसान
गंगा के तराई वाले क्षेत्रों में खेतों की रखवाली करने के लिए किसानों द्वारा अस्थाई झोंपड़ी बना ली जाती है। लेकिन बाढ़ होने के चलते इन झोंपड़ियों में पानी पहुंचने पर किसान इसे खाली कर ऊंचे स्थान पर पहुंच चुके हैं। वहीं उनकी खेती के जलमग्न हो जाने के कारण किसानों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताते हैं कि फूल, सब्जियों सहित करीब एक हजार बीधा फसल डूब चुकी है।
संपर्क मार्गों की स्थिति
गंगा के साथ ही पांडू नदी के उफनाने के चलते सदनहा, बिंदकी फारम, बेरीनारी, बेनीखेड़ा, रामघाट के लिए आवागमन वाले मार्गों पर करीब तीन से चार फीट तक पानी पहुंचने के चलते इनका संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह से कट चुका है। जिससे ग्रामीण गांव में कैद हो चुके हैं, रोजमर्रा व आवश्यक वस्तुओं के लिए ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
जलस्तर बढ़ता जा रहा है
गुरुवार को जहां गांव के रास्तों पर पानी पहुंचने के कारण यह चारो ओर से घिर गए थे वहीं शुक्रवार को जलस्तर में इजाफा होने के चलते बाढ़ का पानी आबादी तक पहुंच रहा है। हालांकि अभी तक पानी घरों तक नहीं पहुंच सका है लेकिन जिस प्रकार से गंगा का जलस्तर बढ़ता जा रहा है उसको देखते हुए शनिवार तक पानी घरों तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
प्रशासन की तैयारियां
बिंदकी फामर, सदनहा, बेरीनारी, रामघाट, बेनीखेड़ा आदि गांव के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाए जाने के लिए प्रशासन द्वारा चार स्थानीय नावों को हायर किया गया है। जिससे पानी घरों तक पहुंचने की दशा में ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर बाढ़ राहत शिविरों में पहुंचाया जा सके। बताते हैं कि फिलहाल चार नाव लगाई गई हैं आवश्यकता पड़ने पर पीएसी की नाव भी लगाई जाएगी।
टीमों की निगरानी
बताते हैं कि ग्रामीणों को राहत शिविरों में पहुंचाने, जलस्तर पर नजर रखने के साथ ही बाढ़ राहत शिविरों में ग्रामीणों को विस्थापित करने के लिए राजस्व विभाग की दस टीमों को लगाया गया है। जिसमें 36 लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। अफसरों ने दावा किया है कि आशापुर व अभयपुर पंचायत भवनों में ग्रामीणों को विस्थापित किए जाने की पूरी तैयारियां की जा चुकी हैं।
जायजा लेने पहुंची टीम
शुक्रवार को जायजा लेने पहुंचे नायब तहसीलदार बिंदकी अमरेश सिंह, आपदा सलाहकार केके त्रिपाठी, एई एलजीसी भीखम चंद्र सहित ग्राम पंचायत अधिकारी, पुलिस, पशु चिकित्सक आदि की टीम के वाहन मार्ग में पानी भरा होने से गांव तक नहीं पहुंच सके। जिस पर अफसरों की टीम ने ट्रैक्टर से गांव पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात कर पानी भरने पर राहत शिविरों में पहुंचने की अपील की।
जलस्तर पर एक नजर...
101.15 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
101.08 मीटर था गुरुवार को जलस्तर
100.86 मीटर है गंगा का खतरे का निशान
कोट...
आशापुर पंचायत भवन, अभयपुर पंचायत भवन में ग्रामीणों को विस्थापित किए जाने की व्यव्थाएं पूरी की जा चुकी हैं, यहां पर ग्रामीणों के रहने व खाने की पूरी व्यवस्था है जलस्तर अधिक बढ़ने पर ग्रामीणों को विस्थापित किया जाएगा। वहीं महुआ घाटी में मवेशियों के लिए हरे चारे आदि की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है।
अमरेश सिंह, नायब तहसीलदार बिंदकी


