खतरे के निशान से ऊपर गंगा, कई परिवारों ने छोड़े आशियाने
उन्नाव में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 113.000 मीटर से ऊपर चला गया है। बांगरमऊ क्षेत्र में कई गांव जलमग्न हो गए हैं और ग्रामीण सड़क पर शरण लेने को मजबूर हैं। बाढ़ राहत केंद्रों में सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जबकि लाखों लोग बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवन यापन कर रहे हैं।

उन्नाव। संवाददाता गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। शुक्रवार सुबह छह बजे केंद्रीय जल आयोग के अनुसार जलस्तर 113.060 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 113.000 मीटर से ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से परियर, शुक्लागंज बांगरमऊ, सफीपुर, बीघापुर तहसील के कटरी क्षेत्र में बाढ़ का संकट और गहरा गया है। कई गांव पानी से घिर गए हैं, जबकि कुछ गांवों में पानी आबादी तक पहुंचने लगा है। आवागमन बाधित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सबसे अधिक हालात बांगरमऊ इलाके हैं, यहां के कई परिवारों सड़क पर शरण ली है.
बलखंडेश्वर मंदिर राहत केंद्र पहुंचे एसडीएम
सदर तहसील क्षेत्र में एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने बाबा बलखंडेश्वर मंदिर स्थित बाढ़ राहत केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान बाबा बलखंडेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष रविशंकर मिश्रा से बाढ़ की स्थिति व राहत व्यवस्था की जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि बाढ़ राहत शिविरों में प्रभावित लोगों की सुविधा के लिए राहत शिविर में गद्दे, पेय जल और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करा दी गई हैं। निगरानी व व्यवस्था के लिए को क्षेत्र में कई टीमें लगा कर लगातार किसी भी आपात स्थिति में तत्काल अलर्ट रहने को कहा। इसके बाद राजस्व विभाग के लेखपाल दीपचंद्र, प्रदीप, योगेश कुमार, शैलेंद्र ने देवीपुरवा, माना बंगला, ललतू पुरवा, पनपथा, बाबू बंगला समेत कई बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। आवागमन के लिए जरूरत के हिसाब से आठ नाव लगाई गई हैं.
बांगरमऊ में प्रभावितों की सड़क पर सिमटी जिंदगी
गंजमुरादाबाद। बांगरमऊ क्षेत्र के नया पुरवा, मल्लहन पुरवा, भिखारी पुरवा, धन्ना पुरवा, हरिगंज व कुशाल पुरवा चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। घरों के आसपास पानी भरने के बाद ग्रामीण गांव में बची पक्की सड़क पर शरण लिए हुए हैं। यही सड़क लोगों के साथ पशुओं के लिए भी सहारा बनी हुई है। चारों ओर पानी होने से खानपान के साथ पेयजल का संकट भी गहराने लगा है। पीड़ित विद्युत कटौती सहित तमाम बुनियादी सुविधाओं बगैर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व कर्मी धरातल पर मदद पहुंचाने का काम नहीं कर रहे हैं, सिर्फ कागजों पर ही व्यवस्थाएं सीमित हैं। कटरी क्षेत्र के गदनपुर आहार, फरीदपुर कट्टर, जगतनगर, मेला आलम शाह, भिखारीपुर पतसिया और सिरधरपुर एहतमाली समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं मेला रामकुंवर, दारापुर, छतरापुर, बल्लापुर और बेहटा कच्छ में भी पानी प्रवेश करने लगा है.
ढाई हजार से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित
बीघापुर। गंगा व पांडु नदी के बीच बसे दूलीखेड़ा व लालखेड़ा में बाढ़ का असर बढ़ गया है। लालखेड़ा चारों ओर से पानी से घिर गया है। दूलीखेड़ा के पचघरा, अयोध्यापुरी, शंभू का पुरवा, चौड़ा का पुरवा, जगनू का पुरवा और चोरघटिया की करीब ढाई हजार आबादी प्रभावित है। लालखेड़ा के मिश्रनखेड़ा व चहलहा समेत गंगा किनारे बसे गांवों में बड़े घरों में पानी घुस गया है। ग्रामीण छोटी नावों के सहारे सामान निकालकर दूलीखेड़ा-शिवराजपुर-फतेहपुर मार्ग के किनारे पहुंच रहे हैं। पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। दूलीखेड़ा के प्रधान श्रीकृष्ण यादव ने बाढ़ राहत केंद्र खोलने की मांग की। आशीष यादव, धनंजय यादव, वीरेंद्र ने भी राहत और पशुओं के चारे की व्यवस्था की मांग की। एसडीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत केंद्रों पर टीमें सक्रिय हैं.
कई मार्ग बंद, नाव से आवागमन
सफीपुर। गंगा व कल्याणी नदी का पानी बढ़ने से कटरी क्षेत्र के करीब 10 गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है। मंगलवार से परियर-दबौली मार्ग पर जमालनगर गैर एहतमाली पुल के ऊपर तेज बहाव के कारण आवागमन बंद है। ग्रामीण नाव के सहारे नदी पार कर रहे हैं। रामपुर मार्ग पर भी पानी भरने से पैदल निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण सनहा होकर लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं। नीबीगड़ा, अल्लीपुर, हमजापुर, कारीमाबाद, उड़नकपुरवा और शेरपुर पहले ही पानी से घिर चुके हैं। मुरादपुर में पानी मकानों तक पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने की सूचना पर तहसीलदार अविनाश चौधरी ने लेखपालों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी लेकर राजस्व टीम को लगातार निगरानी के निर्देश दिए.


