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हसबुल्ला ने गायों को ठूंस-ठूंसकर खिलाया पराठा और कटहल, 5 की दर्दनाक मौत

केरल में एक किसान ने अपनी गौशाला की गायों को चारे की जगह मैदे से बना पराठा और कटहल ठूंस-ठूंसकर खिला दिया। इससे पांच गायों की मौत हो गई और नौ का इलाज चल रहा है।

हसबुल्ला ने गायों को ठूंस-ठूंसकर खिलाया पराठा और कटहल, 5 की दर्दनाक मौत
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,तिरुवंतपुरमTue, 18 Jun 2024 09:04 AM
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केरल की एक गौशाला में गायों को कथित तौर चारे की जगह मैदे से बना पराठा और कटहल ठूंस-ठूंसकर खिलाने का मामला सामने आया है। अधिक खाने से पांच गायों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि, नौ को इलाज के लिए पशु अस्पताल में भर्ती किया गया है।

पराठा और कटहल से मरने वाली गायें हसबुल्ला नाम के एक डेयरी किसान की बताई जा रही हैं। वह पिछले 20 साल से गायों का पालन कर रहा है। इस मामले में राज्य के पशुपालन मंत्री ने उसकी गौशाला का दौरा भी किया। उन्होंने कहा कि किसान को उसके नुकसान की भरपाई की जाएगी।

बता दें कि पराठा मैदा से बनी एक रोटी का प्रकार है। यह केरल समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में लोकप्रिय व्यंजन है। उसे तवे पर तलकर तैयार किया जाता है।

घटना क्या हुई
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को अचानक गायें बेहोश होने लगीं। किसान के कॉल पर पहुंची पशु चिकित्सक टीम के अधिकारियों ने गायों को चेक करना शुरू किया। पशु कल्याण विभाग के अनुसार, पांच गायों की मौत हो चुकी थी। जबकि, नौ गायों में कंपन हो रहा था। जांच से पता चला कि पराठा और कटहल अधिक खाने से उनका ऐसा हाल हुआ है। 

हसबुल्ला ने ऐसा क्यों किया
ऐसी जानकारी सामने आई है कि हाल ही में पशुओं के चारे की कीमत बढ़ गई थी। जिसके बाद हसबुल्ला ने अपनी गायों को पराठा, कटहल और इमली के बीज की भूसी का मिश्रण खिलाना शुरू कर दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, "पराठा के लिए एक निश्चित मात्रा तय की गई थी, लेकिन हसबुल्ला ने गायों को उस हिसाब से खाना नहीं दिया।"

इस पूरे प्रकरण पर जिला पशुपालन अधिकारी डी शाइन कुमार का कहना है कि अगर गायें बहुत अधिक पराठा, कटहल या चावल का दलिया खाती हैं तो इससे उनके शरीर में लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ सकती है। डिहाईड्रेशन से जानवरों की मौत भी हो सकती है। अगर पराठा बासी है तो फंगस संक्रमण की संभावना भी अधिक रहती है। साथ ही, अत्यधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी गायों के लिए अच्छा नहीं है। जानवरों के लिए घास और हरा चारा ही सबसे उचित आहार है।"