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सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण मर रहीं झीलों व तालाबों में मछलियां

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मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्टों के झीलों और तालाबों में मिलने के कारण इनमें बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं। शासकीय मत्स्य महाविद्यालय के डीन डॉ शशिकांत महाजन ने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार जल निकायों में सीवेज और औद्योगिक रसायनों को छोड़ने से बैक्टीरिया और फंगस का विकास होता है जो कि मछलियों के लिये हानिकारक होता है।


उन्होंने कहा कि मछली किसानों से प्राप्त मृत मछलियां के नमूनों में विषाक्तता के परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण के कारण मछलियां मर रही थीं। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों में जबलपुर, मंडला, बालाघाट, रीवा और कुछ अन्य जिलों से प्राप्त नमूनों और कॉलेज की प्रयोगशाला में परीक्षण से पता चला है कि सीवेज का जल स्त्रोतों में मिलना मछलियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि संक्रमण के कारण गहरे घाव के साथ मछलियों की त्वचा भी क्षतिग्रस्त हो गई और कुछ नमूनों में धातुओं की उपस्थिति भी पाई गई। 

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  • Web Title:Fishes dying in jabalpur due to sewage and industrial wastes coming in pounds and rivers