तीन दिन बाद भी लाल खून के काला कारोबार मामले में एफआईआर नहीं
तीन दिन बाद भी सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की अवैध खरीद-बिक्री मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है। अस्पताल प्रबंधन और पुलिस के बीच दावों के कारण मामला उलझा हुआ है। पीड़ितों में आक्रोश है और लोगों का कहना है कि यदि यह मामला आम व्यक्ति से जुड़ा होता, तो पुलिस कार्रवाई हो चुकी होती।

तीन दिन बाद भी लाल खून के काला कारोबार मामले में एफआईआर नहीं लीपापोती की चर्चा तेज, पी़ड़ितों में आक्रोश बिहारशरीफ, एक संवाददाता। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित रूप से खून की अवैध खरीद-बिक्री के मामले का खुलासा हुए तीन दिन बीत चुके हैं। लेकिन, अब तक आरोपित महिला सुरक्षा गार्ड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी है।
मामले में देरी
इस देरी के बाद पूरे मामले को दबाने और लीपापोती करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के अलग-अलग दावों ने भी मामले को और उलझा दिया है। इससे लोगों में काफी आक्रोश है। थानाध्यक्ष सम्राट दीपक ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से जो पहला आवेदन दिया गया था, उसमें न तो पीड़ित का स्पष्ट नाम दर्ज था और न ही आरोपित का नाम और पता। ऐसे त्रुटिपूर्ण आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करना कानूनी रूप से संभव नहीं है। स्पष्ट तथ्यों और संबंधित व्यक्तियों की पहचान के बिना किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। उधर, अस्पताल प्रबंधक मो. इमरान ने बताया कि पुलिस की आपत्ति के बाद संशोधित आवेदन दोबारा भेज दिया गया है। नए आवेदन में पीड़ित, ब्लड बैंक के टेक्निशियन का नाम, आरोपित महिला सुरक्षा गार्ड का नाम और पता सहित सभी आवश्यक विवरण दिए गए हैं। अब प्राथमिकी दर्ज करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। हालांकि, घटना के तीन दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है। लोगों खासकर पीड़ितों का कहना है कि यदि मामला किसी आम व्यक्ति से जुड़ा होता, तो अब तक पुलिसिया कार्रवाई पूरी हो चुकी होती। क्या था मामला : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की अवैध खरीद-बिक्री का मामला तब सामने आया, जब आरोप लगा कि एक प्रसूता को रक्त उपलब्ध कराने के नाम पर उसके परिजनों से 13 हजार रुपये वसूले गए। आरोप है कि अस्पताल में तैनात महिला सुरक्षा गार्ड ने रुपये लेकर खून उपलब्ध कराया। मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रबंधन ने जांच के बाद संबंधित महिला गार्ड को हटाते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में आवेदन दिया। (बिहारशरीफ से प्रणय कुमार)


