छोटे कर्ज के मोटे ब्याज में फंसे रहे ग्राहक
शोल्डर : इस श्रेणी के ऋण पर फिनटेक कंपनियों का कब्जा, ऊंचे ब्याज और वसूली

नई दिल्ली। देश में 50 हजार रुपये से कम के छोटे व्यक्तिगत कर्ज बाजार पर मोबाइल ऐप और फिनटेक कंपनियों का कब्जा होता जा रहा है। बिना किसी गारंटी के केवल पैन और पहचान पत्रों के जरिए झटपट कर्ज बांटने वाली इन कंपनियों की हिस्सेदारी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सरकारी और निजी बैंकों ने जोखिम को देखते हुए ऐसे बिना गारंटी वाले छोटे ऋणों से दूरी बना ली है। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक ₹50,000 से कम के छोटे कर्ज बाजार में फिनटेक कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर 56.8 फीसदी हो गई है। वहीं, एक साल में इनके लोन वितरण में 41.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि पूरे छोटे लोन बाजार की वृद्धि 20.1 फीसदी रही। यानी छोटे लोन के बाजार में सबसे तेज विस्तार फिनटेक कंपनियों का हुआ है। फिनटेक कंपनियां मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए कुछ ही मिनटों में लोन मंजूर कर देती हैं, इसलिए लोगों का रुझान तेजी से इनकी ओर बढ़ा है। ऐसे कर्ज में जोखिम भी अधिक होता है, क्योंकि इसके बदले कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती।
कर्ज डूबने के मामले भी तेजी से बढ़े
चिंता की बात यह है कि फिटेक कंपनियों के कर्ज डूबने के मामले भी तेजी बढ़े हैं। इस आसान कर्ज के जाल में फंसकर कर्ज न चुका पाने वाले लोगों (डिफॉल्टर्स) की संख्या भी तेजी से बढ़कर 6.4% पर पहुंच गई है, जबकि मार्च 2025 में यह दर 6.2 और मार्च 2024 में 4.5 प्रतिशत थी। फिनटेक कंपनियों के कुल लोन पोर्टफोलियो में 70.5 फीसदी हिस्सेदारी बिना किसी गारंटी वाले कर्जों की है। ऐसे में इनके डूबने की आशंका भी ज्यादा है। आरबीआई का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में फिनटेक कंपनियों के खराब कर्ज (एनपीए) का जोखिम और बढ़ सकता है।
बैंक छोटे ऋण से बना रहे दूरी
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छोटे ऋण के बाजार से बैंक धीरे-धीरे पीछे हट रहे हैं। बैंक बिना गारंटी या सुरक्षा वाले कर्ज देने में अब पहले जितनी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पिछले एक साल में 50 हजार रुपये तक के छोटे लोन में बैंकों की हिस्सेदारी 30.8 फीसदी घट गई। इससे पहले भी मार्च 2025 में उनकी हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी घटी थी। दूसरी ओर, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने भी इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। मार्च 2026 तक उनकी हिस्सेदारी 17.5 फीसदी बढ़ी है। हालांकि सबसे बड़ा फायदा फिनटेक कंपनियों को हुआ है, जिन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए तेजी से ग्राहकों तक पहुंच बनाई है।
महंगा पड़ रहा झटपट मिलने वाला लोन
फिनटेक कंपनियों द्वारा ऐप के जरिए झटपट बांटे जा रहे ऋण लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। ये कंपनियां कुछ ही मिनटों में बिना किसी गारंटी के 50 हजार रुपये तक का लोन दे देती हैं लेकिन इसके बदले वे 14 से 18 फीसदी तक मोटा ब्याज वसूलती हैं। अगर ग्राहक समय पर किस्त नहीं चुकाता तो उस पर पेनल्टी लग जाती है और ब्याज 18 से 24 फीसदी या उससे भी अधिक हो सकता है। इन कंपनियों के सबसे ज्यादा ग्राहक युवा हैं। इनमें बड़ी संख्या कॉलेज के छात्रों और नौकरी शुरू करने वाले युवाओं की है। कई बार जल्द पैसे की जरूरत में लोग बिना ब्याज और शर्तें समझे लोन ले लेते हैं। बाद में किस्त नहीं भर पाने उनके माता-पिता को नोटिस जारी किया जाता है।
रिकवरी का तरीका बना चिंता की वजह
आरबीआई के अनुसार, फिनटेक कंपनियों से कर्ज लेने वाले 50 फीसदी से ज्यादा लोगों की उम्र 35 साल से कम है। वॉयस ऑफ बैंकिंग के संस्थापक अश्वनी राणा का कहना है कि बैंक बिना सुरक्षा वाले लोन देने से बच रहे हैं, लेकिन फिनटेक कंपनियां तेजी से ऐसे लोन बांट रही हैं। उनका कहना है कि कई कंपनियों की ऋण वसूली का तरीका भी काफी खराब रहता है। आरबीआई के निर्देशों के बावजूद समय पर किस्त नहीं देने पर कुछ कंपनियां ग्राहकों को लगातार परेशान करती हैं और जानबूझकर उनका सिबिल स्कोर खराब कर देती हैं। बैंक किसी भी ऋण पर एक तय सीमा तक ब्याज ले सकते हैं। जबकि फिनटेक कंपनियां पेनल्टी लगाकर 24 प्रतिशत तक ब्याज वसूलती हैं, जो एक तरह वसूली मॉडल जैसा है।
शिकायतों की भरमार
आरबीआई ने रिकवरी एजेंटों के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इसके बावजूद फिनटेक कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। बैंकिंग लोकपाल और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं।
केस-1 : राजकुमार मैती नाम के एक ग्राहक ने सोशल मीडिया पर आरबीआई को टैग करते हुए शिकायत की कि रिकवरी एजेंट तय समय से पहले उन्हें और उनके परिवार के लोगों को फोन कर अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आरबीआई के नियमों का उल्लंघन है।
केस-2 : समीर नाम के एक अन्य ग्राहक ने शिकायत की कि रिकवरी एजेंट बिना किसी अधिकृत पत्र के उनके घर पहुंचे और उनके बेटे को लोन की जानकारी दे दी, जबकि नियमों के अनुसार उधारकर्ता की जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी बिना किसी वैध रिकवरी नोटिस के उन्हें हर दिन 50-60 फोन कॉल कर रही है, जो आरबीआई के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।
क्या होती है फिनटेक कंपनी?
फिनटेक ऐसी कंपनी होती है, जो मोबाइल ऐप, वेबसाइट और डिजिटल तकनीक के जरिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं देती है। इनमें पर्सनल लोन, पेमेंट, निवेश, बीमा और क्रेडिट जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन कंपनियों में लोन की मंजूरी जल्दी मिल जाती है और दस्तावेज भी कम लगते हैं, लेकिन ब्याज दर और अन्य शुल्क बैंक से अधिक हो सकते हैं।
लोन लेने से पहले इन बातों की जांच जरूर करें
- ब्याज दर कितनी है, यह पहले समझें।
- प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी और अन्य शुल्क भी देखें।
- किस्त समय पर नहीं भरने पर कितनी पेनल्टी लगेगी, यह पढ़ें।
- कंपनी आरबीआई के साथ पंजीकृत है या नहीं, इसकी जांच करें।
- ऐप को कौन-कौन सी मोबाइल अनुमति (कॉन्टैक्ट, फोटो, लोकेशन आदि) देनी होगी, यह भी देखें।
- जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से बचें और शर्तें पढ़े बिना 'ओके' या 'एग्री' पर क्लिक न करें।
आरबीआई के नियम क्या कहते हैं?
- रिकवरी एजेंट धमकी या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
- ग्राहक की कर्ज संबंधी जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं की जा सकती।
- वसूली के दौरान ग्राहक की निजता का सम्मान करना जरूरी है।
- बार-बार फोन करके या मानसिक दबाव बनाकर वसूली नहीं की जा सकती।
- शिकायत होने पर ग्राहक पहले संबंधित कंपनी से और समाधान न मिलने पर आरबीआई के एकीकृत लोकपाल के पास शिकायत कर सकता है।


