सिविल सर्जन ने डीएस समेत तीन कर्मियों का वेतन रोका, मांगा स्पष्टीकरण
कोडरमा सदर अस्पताल में 30 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। पूर्व लेखा लिपिक के स्तर से किए गए भुगतान और बैंक को भेजे गए पत्रों में गंभीर नियमों का उल्लंघन हुआ है। सिविल सर्जन ने तीन कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है और उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है।

कोडरमा, वरीय संवाददाता। सदर अस्पताल कोडरमा में वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। तबादले के बाद विधिवत विमुक्त किए जा चुके लेखा लिपिक के स्तर से 30 लाख रुपये से अधिक के भुगतान की फाइलें बढ़ाने और बैंक को पत्र भेजे जाने का खुलासा हुआ है। पूरे प्रकरण को वित्तीय नियमों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ रंजीत कुमार, रूपेश कुमार और सुजीत कुमार से स्पष्टीकरण मांगा है। तीनों के वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग तथा झारखंड सरकार के मुख्य सचिव के निर्देश पर वित्तीय कार्यों से जुड़े कर्मियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया के तहत वर्षों से सदर अस्पताल में पदस्थापित लेखा लिपिक रूपेश कुमार का तबादला किया गया था। सिविल सर्जन
नए कर्मचारी को दरकिनार कर बढ़ीं भुगतान की फाइलें
डॉ. अनिल कुमार ने 16 मई को आदेश जारी कर 19 मई तक संपूर्ण प्रभार हस्तांतरित करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद 22 मई से 15 जून के बीच विभिन्न एजेंसियों एवं अन्य मदों में 30 लाख रुपये से अधिक की राशि आरटीजीएस और अन्य माध्यमों से हस्तांतरित कर दी गई। जांच में सामने आया कि इन भुगतानों से संबंधित फाइलें और बैंक को भेजे गए पत्र स्थानांतरित हो चुके रूपेश कुमार के स्तर से ही संचालित हुए।
संपूर्ण प्रभार सौंपे बिना जारी हुआ एलपीसी
पत्र के अनुसार, रूपेश कुमार को सदर अस्पताल से विधिवत तबादला कर दिया गया था। अस्पताल अधीक्षक ने अलग आदेश जारी कर अस्पताल प्रबंधन प्रणाली (एचएमएस) सहित विभिन्न शाखाओं का प्रभार नए लेखा लिपिक को सौंप दिया था। ऐसी स्थिति में वित्तीय फाइलों का परीक्षण, भुगतान प्रस्ताव तैयार करना तथा बैंक को भुगतान संबंधी पत्र भेजने का अधिकार नए प्रभारधारी के पास होना चाहिए था। इसके बावजूद पुराने लेखा लिपिक द्वारा भुगतान प्रक्रिया संचालित किए जाने से विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
एक ही अवधि में दो अस्पतालों से वेतन निकासी का आरोप
मामले में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है। नियमों के अनुसार, किसी भी स्थानांतरित कर्मी को संपूर्ण प्रभार हस्तांतरित करने के बाद ही अंतिम वेतन प्रमाण पत्र (एलपीसी) जारी किया जाता है। आरोप है कि सदर अस्पताल में प्रभार पूरा कराए बिना ही रूपेश कुमार को एलपीसी जारी कर दिया गया। इसके बाद भी उनका वित्तीय हस्तक्षेप जारी रहना पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बना रहा है।
डिस्पैच रजिस्टर नहीं सौंपने से व्यवस्था प्रभावित
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि स्थानांतरित लेखा लिपिक सुजीत कुमार ने डोमचांच से तबादला होने के बाद वहां प्रभार देने की अवधि में भी वेतन प्राप्त किया और सदर अस्पताल में योगदान देने के बाद यहां से भी वेतन निकासी कर ली। विभाग ने एक ही अवधि में दो संस्थानों से वेतन भुगतान को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
स्थानांतरण के बावजूद पुराने लेखा लिपिक ने डिस्पैच रजिस्टर सहित कई महत्वपूर्ण अभिलेख नए प्रभारधारी को नहीं सौंपे। इससे कार्यालयीन पत्राचार, वित्तीय अभिलेखों की उपलब्धता और पारदर्शिता प्रभावित हुई है।
तीनों से मांगा जवाब, वेतन पर लगी रोक
पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ रंजीत कुमार, रूपेश कुमार और सुजीत कुमार से स्पष्टीकरण मांगा है। तीनों के वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।
कुछ भुगतान मुझे भ्रमित कर पारित करा लिए गए थे। मामला संज्ञान में आते ही स्पष्टीकरण जारी किया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अनिल कुमार, सिविल सर्जन, कोडरमा


