बिहार शताब्दी योजना से 32 असंगठित मजदूरों को मिला लाभ
बिहार में असंगठित क्षेत्र के 32 मजदूरों को आर्थिक सहायता दी गई है। रेलवे दुर्घटना में दोनों पैर गंवाने वाले पिंटू कुमार और गुजरात में दुर्घटना में मरे रमेश राम के परिवार को सहायता मिली। सरकार ने 1 अप्रैल 2011 से शताब्दी योजना शुरू की, जिससे मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

पेज पांच की लीड ----------- मदद रेल दुर्घटना में दोनों पैर गंवाने वाले साफाखाना रोड निवासी को मिली दो-दो लाख की आर्थिक सहायता छह प्रवासी मजदूरों के परिवार को श्रम विभाग की ओर से सहायता स्वाभाविक मौत पर पचास हजार और दुर्घटना में मौत पर दो लाख 75 हजार पूर्ण स्थायी पर मिलती है सहायता 14 न्यूतम मजदूरी के मामले का हुआ निष्पादन फोटो संख्या- 03, कैप्सन- गुरुवार को सोवां के ईट भठ्ठा पर शताब्दी योजना के बारे में जागरुकता अभियान चलाती श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी सौम्या सिन्हा। डुमरांव, हमारे प्रतिनिधि।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए वित्तीय सहायता
प्रखंड क्षेत्र में असंगठित क्षेत्र के 32 मजदूरों के बिहार शताब्दी योजना के तहत आर्थिक मदद दी गई है। इसके साथ ही दुर्घटना में जान गंवाने वाले छह प्रवासी मजदूरों को दो-दो लाख रूपये की सहायता दी गई। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के जीवन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने लाभकारी शताब्दी योजना लागू की है। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी ने ईट भठ्ठा से लेकर निर्माण में लगे मजदूरों के बीच जागरुकता अभियान चलाकर उन्हें योजनाओं के बारे में जानकारी दी है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर परिवार का पेट भरने के लिए अपनी जान को भी जोखिम में डाल देते है। ऐसे मजदूरों की मौत पर परिवार की रोटी छीन जाती है।
शताब्दी योजना की जानकारी
असंगठित क्षेत्र के कामगार व शिल्पकार को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने 1 अप्रैल 2011 से बिहार शताब्दी योजना की शुरुआत की थी। लेकिन अब श्रम विभाग से शत प्रतिशत मजदूरों को इसका लाभ मिल रहा है। अधिक से अधिक मजदूरों को इस योजना से जोड़ने के उद्देश्य से श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी सौम्या सिन्हा के नेतृत्व में जागरुकता अभियान चलाया गया। सोवां के ईट भठ्ठा पर मजदूरों को योजना के बारे में जानकारी दी गई। साथ इसकी प्रक्रिया के बारे में बताया गया।
योजना के तहत मिलने वाले लाभ
मजदूरी के दौरान मजदूर के चोटिल होने और मृत्यु होने जैसी घटनाएं भी होती रहती है। घटनाओं में मौत होने पर मजदूर परिवार पूरी तरह लाचार हो जाती है। ऐसे परिवारों को बिहार शताब्दी योजना के तहत लाभ दिया जा रहा है। श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी ने बताया कि मजदूर की दुर्घटना में मौत होने पर दो लाख मुआवजा दिया जाता है। दुर्घटना में चोट लगने पर पांच हजार, असाध्य रोग की स्थिति में 7500 और 30 हजार चिकित्सा सहायता देने का प्रावधान है। श्रम विभाग के अनुसार मजदूर की स्वभाविक मृत्यु पर 50 हजार, पूर्ण स्थायी निशक्तता पर 75 हजार और स्थायी आंशिक निशक्तता पर 37500 की राशि देने का प्रावधान है।
मजदूर परिवारों को मिली सहायता
श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी ने बताया कि 32 में 23 मजदूरों की स्वाभाविक मौत हुई है। मजदूर की स्वाभाविक मौत पर 23 परिवारों को योजना से 50-50 हजार की आर्थिक सहायता दी गई है। साफाखाना रोड निवासी पिंटू कुमार ने आगरा में ट्रेन दुर्घटना के दौरान अपना दोनों पैर गंवा दिया था। पिंटू को योजना से 75 हजार की आर्थिक मदद दी गई है। इसी तरह दखिनांव के रमेश राम की मौत गुजरात के दाना फैक्ट्री में दुर्घटना के दौरान हो गई थी। उनकी पत्नी को शताब्दी योजना से दो लाख की सहायता दी गई है। छह माह के भीतर कुल छह प्रवासी मजदूरों की मौत पर दो-दो लाख की आर्थिक सहायता दी गई है। पदाधिकारी ने बताया कि न्यूनतम मजदूरी के 14 विवाद को सुलझाते हुए मजदूरी का भुगतान कराया गया है। बताया कि मजदूर न्यूनतम मजदूरी और बकाया मजदूरी के विवाद से संबंधित मामले विभाग को बताएं। उसका समाधान किया जाएगा। (डुमरांव से अजय कुमार सिंह)


