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हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन को भारत रत्न, बदल दी थी कृषि की तस्वीर

पीएम मोदी ने लिखा कि यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन जी को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है।

हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन को भारत रत्न, बदल दी थी कृषि की तस्वीर
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 09 Feb 2024 01:09 PM
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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए कहा कि महान कृषिविज्ञानी डॉ. एमएस स्वामीनाथन को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने कहा कि कृषि और किसानों के कल्याण में उल्लेखनीय योगदान करने वाले डॉ. एमएस स्वामीनाथन को उनकी सरकार भारत रत्न से नवाज रही है।

पीएम मोदी ने लिखा, "यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन जी को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत को कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्कृष्ट प्रयास किए।"

उन्होंने आगे लिखा, "एक इनोवेटर और मेंटॉर के रूप में उन्होंने कई काम किए। उन्होंने छात्रों को सीखने और रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया। हम उनके इन अमूल्य काम को पहचानते हैं। डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व ने न केवल भारतीय कृषि को बदल दिया है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें मैं करीब से जानता था और मैं हमेशा उनकी बताई बातों और इनपुट को महत्व देता था।" हरित क्रांति के जनक डॉक्टर स्वामीनाथन को गेहूं और चावल की उच्च उपज देने वाली किस्मों को तैयार करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने भारत की कृषि पैदावार को बढ़ाने में जो भूमिका निभाई उसके लिए उन्हें हरित क्रांति का मुख्य वास्तुकार कहा जाता है।

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पिछले साल हुआ था निधन

प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन का पिछले साल सितंबर में 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनका जन्म 7 अगस्त, 1925 को हुआ था। उनका पूरा नाम मनकोम्बु संबासिवन स्वामिनाथन था। इससे पहले कृषि के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा सन 1972 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

भारत को बनाया कृषि प्रधान देश

आज के कृषि प्रधान भारत को अकाल और भुखमरी से निजात दिलाने में डॉक्टर स्वामीनथन का योगदान जगजाहिर है। उन्होंने सबसे पहले गेंहू की एक बेहतरीन किस्म की पहचान की। ये मैक्सिकन गेहूं की एक किस्म थी। उनके इस कदम के बाद भारत में भुखमरी की समस्या खत्म हुई। इसके बाद गेंहू के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बना। कभी हम बाहर से गेहूं धान आदि मंगाते थे लेकिन आज हम आयात करने वाले देश से एक प्रमुख निर्यातक देश बन गए हैं।

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली को मजबूत करने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण था। डॉ स्वामीनाथन विश्व खाद्य पुरस्कार (1987) के पहले विजेता थे। उन्हें 1971 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, 1987 में अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व विज्ञान पुरस्कार, 1994 में शांति के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार, 1994 में यूएनईपी ससाकावा पर्यावरण पुरस्कार, 1999 में यूनेस्को गांधी स्वर्ण पदक और कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। 

उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी अलंकृत किया गया था। वह भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष और खाद्य और कृषि संगठन, रोम के अध्यक्ष थे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक और एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन, चेन्नई के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

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