मौसम के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से करें खेती

हिन्दुस्तान, सिद्धार्थ
Follow us on Google News
share

15 एसआईडीडी 01: डॉ. प्रवेश कुमार, कृषि वैज्ञानिक, केवीके सोहना 15 एसआईडीडी01: डॉ. प्रवेश कुमार, कृषि वैज्ञानिक, केवीके सोहना

मौसम के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से करें खेती

सोहना, हिन्दुस्तान संवाद। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच किसानों के लिए अब केवल मेहनत नहीं, बल्कि मौसम के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से खेती करना भी जरूरी हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने किसानों से जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम के कारण अनियमित वर्षा, लंबे सूखे, भीषण गर्मी, शीतलहर, ओलावृष्टि और कीट-रोगों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित हो रही है।उन्होंने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में धान, गेहूं, गन्ना, दलहन और तिलहन प्रमुख फसलें हैं।

यहां हर वर्ष अनियमित बारिश और जलभराव से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाकर इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कि किसान भारतीय मौसम विभाग के मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और कीटनाशी छिड़काव का समय तय करें। इससे लागत घटेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। उन्होंने सूखा, जलभराव और अधिक तापमान सहन करने वाली उन्नत एवं कम अवधि में तैयार होने वाली फसल किस्मों को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि खेतों की मेड़बंदी, वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी तकनीकों से पानी की बचत के साथ उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। वहीं मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग, जैव उर्वरकों, गोबर की खाद, हरी खाद व फसल अवशेष प्रबंधन से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने धान-गेहूं आधारित पारंपरिक फसल चक्र से आगे बढ़ते हुए दलहन, तिलहन, सब्जियों, फलों और चारा फसलों को खेती में शामिल करने की सलाह दी। इससे मौसम जनित जोखिम कम होगा और किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होंगे। साथ ही एकीकृत रोग एवं कीट प्रबंधन तकनीकों, जैविक उपायों और प्राकृतिक शत्रुओं के उपयोग से उत्पादन लागत घटाने की बात कही। उन्होंने किसानों से मेघदूत, किसान सुविधा, किसान सारथी, पूसा कृषि और दामिनी जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम, फसल सुरक्षा, बाजार भाव और वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर समयानुकूल निर्णय लेने की भी अपील की। उनका कहना था कि बदलते जलवायु परिदृश्य में वैज्ञानिक व तकनीक आधारित खेती ही किसानों की आय और कृषि को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।