नाइट्रोजन को एकत्रित करने और मिट्टी में उर्वरा शक्ति बनाए रखने वाली है दलहनी फसल
बड़हरिया के हरदोबारा गांव में आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत अरहर की खेती के पहले सत्र का प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। किसानों को दलहनी फसलों की महत्ता, खाद और पानी की कम आवश्यकता, और बुवाई के लिए राइजोबियम कल्चर के उपयोग पर जानकारी दी गई। 117 किसानों को बिहार कृषि ऐप से जोड़ा गया।

बड़हरिया। प्रखंड की हरदोबारा पंचायत के हरदोबारा गांव (पूरब टोला) में सतीश सिंह सहायक तकनीकी प्रबंधक, बृजेश कुमार पाठक कृषि समन्वयक और दिलीप कुमार किसान सलाहकार की उपस्थिति में आत्मनिर्भर दलहन योजना अंतर्गत अरहर की खेती प्रथम सत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को बताया गया कि जिस भी अनाज में दो दाले निकलती है उसे दलहनी फसल कहते हैं। साथ में दलहनी फसलों में खाद, और पानी की कम आवश्यकता होती है। और इसे ऊपरी जमीन पर आसानी से खेती किया जा सकता है। जहां जल जमाव न हो। दलहनी फसल विलुप्त हो रही है। जिससे मृदा में भी दिक्कत आ रही है।
इसलिए किसान भाई को दलहनी फसलों की खेती करना चाहिए। दलहनी फसल को बुआई के समय राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार जरूर करना चाहिए। साथ में दलहनी फसलों की जड़ों में वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन को एकत्र करने की क्षमता भी होती है। कार्यक्रम में कृषि विभाग की योजना, केसीसी ,बिहार कृषि ऐप के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ में 117 किसान को बिहार कृषि ऐप से जोड़ा भी गया।


