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संसद सत्र में सरकार के लिए मुसीबत बनेगा किसान आंदोलन, विपक्ष ने दिखाए तेवर

विशेष संवाददाता, हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Himanshu Jha
Tue, 26 Jan 2021 07:47 AM
संसद सत्र में सरकार के लिए मुसीबत बनेगा किसान आंदोलन, विपक्ष ने दिखाए तेवर

संसद के बजट सत्र में सरकार के लिए किसान आंदोलन मुसीबत बन सकता है। अधिकांश विपक्षी दल कृषि संबंधी विधेयकों को वापस लेने की मांग कर रहे किसानों के साथ हैं और वह भी इसके लिए सरकार पर दबाब बना रहे हैं। बीते मानसून सत्र में राज्यसभा में इन विधेयकों पर हुए विरोध को देखते हुए इस बार भी हंगामा होने के आसार है। हालांकि सरकार ने बजट पेश होने के पहले तीस जनवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई है जिसमें प्रधानमंत्री मौजूद रहेंगे।

संसद का बजट सत्र 29 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होगा। इसके बाद एक फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा। विपक्ष शुरू से ही किसान आंदोलन का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। ऐसे में सरकार के लिए सत्र में काफी समस्या खड़ी हो सकती है। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी साफ कर चुके हैं सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित करने के बाद विभिन्न मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन इस बार हालात अलग तरह के बन हुए हैं।

सोमवार को मुंबई में राकांपा नेता शरद पवार ने किसान रैली का नेतृत्व कर साफ कर दिया कि संसद में विपक्ष इस कानूनों को लेकर सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रहने वाला है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि सरकार संसद में एक और विधेयक लेकर आए जिसमें तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का प्रावधान किया जाए। कांग्रेस लगातार इन विधेयकों की वापसी की मांग कर रही है और उसके नेता राहुल गांधी लगातार सरकार के खिलाफ हमलावर हैं।

दूसरी तरफ सरकार की कोशिश है कि किसानों की मंगलवार की ट्रेक्टर रैली के बाद कोई रास्ता निकाला जाए जिससे आंदोलन को समाप्त कराया जा सके। हालांकि अभी तक किसान कानून वापसी पर अडिग हैं और सरकार भी इनको पूरी तरह वापस लेने को तैयार नहीं है। सुलह समझौते के सारे प्रयास असफल रहे हैं। अब बुधवार को अगर सरकार कोई नई पहल करती है तो बातचीत आगे बढ़ सकती है। इसके पहले सरकार द्वारा शनिवार तक विचार करने की सीमा भी समाप्त हो चुकी है। फिलहाल सरकार के पास कोई नया प्रस्ताव नहीं है और किसान भी टस से मस होने को तैयार नहीं है।

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