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किसानों को दिल्ली जाने से रोकने की साजिश, हरियाणा-पंजाब बॉर्डर सील करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

किसान संगठनों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए हरियाणा व पंजाब की सीमा को सील करने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

किसानों को दिल्ली जाने से रोकने की साजिश, हरियाणा-पंजाब बॉर्डर सील करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,चंडीगढ़Mon, 12 Feb 2024 07:49 PM
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किसान संगठनों का दिल्ली कूच रोकने के लिए हरियाणा व पंजाब की सीमा को सील करने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। पंचकूला के उदय प्रताप सिंह ने जनहित याचिका दायर कर केंद्रीय गृह मंत्रालय, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को प्रतिवादी बनाया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि पुलिस द्वारा डराने-धमकाने की रणनीति के साथ ऐसी कार्रवाई न केवल मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन के सिद्धांतों को भी कमजोर करती है। याचिका पर हाईकोर्ट मंगलवार यानी 13 फरवरी को सुनवाई करेगा। 

इंटरनेट सेवाओं को रोकने से और खराब हुई स्थिति
याचिका में कहा गया है कि किसानों को रोकने के लिए हरियाणा-पंजाब की सीमा को सील कर दिया गया है। अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर सड़क पर कील लगाना, कंक्रीट की दीवारों को मजबूत करना, करंट और कांटेदार तार की बाड़ जैसे अवरोध पैदा किए गए हैं। किसान शांतिपूर्वक विरोध कर रहे हैं, इसके बावजूद सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। यह कानून के शासन द्वारा शासित एक लोकतांत्रिक समाज की नींव को कमजोर करने वाला काम है। 

अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद , हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जैसे कई जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और बल्क एसएमएस को निलंबित करने सहित हरियाणा के अधिकारियों की कार्रवाई ने स्थिति को और खराब कर दिया है। लोगों को सूचना और संचार के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।

आम जनता को भारी दिक्कत
याचिका में कहा गया है कि सड़क की नाकाबंदी से न केवल लोगों को असुविधा होती है, बल्कि एम्बुलेंस, स्कूल बसों, पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों की आवाजाही भी बाधित होती है। वैकल्पिक मार्गों पर यातायात बढ़ गया है, जिससे यात्रियों के लिए दकठिनाइयां हो रही हैं, जिनमें वकील, डॉक्टर और आपातकालीन सेवाएं जैसे पेशेवर शामिल हैं, जो अपने कार्यस्थलों तक पहुँचने में असमर्थ हैं। याचिकाकर्ता ने एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित एक फैसले का हवाला दिया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने माना है कि विरोध प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक मार्गों पर कब्जा स्वीकार्य नहीं है। प्रशासन को सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण या अवरोधों से मुक्त रखना चाहिए। 

उधर, कई जिलों जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 लागू करने के साथ-साथ विभिन्न सड़कों पर सीमेंट बैरिकेड्स और अन्य बाधाएं लगाना राज्य के अधिकारियों द्वारा किसी के विरोध करने के अधिकार को दबाने का प्रयास को दर्शाता है।

रिपोर्ट: मोनी देवी

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