ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के जमीन विवाद को लेकर कल होगी महापंचायत
फरीदाबाद के सोतई गांव में, नोएडा एयरपोर्ट के लिए एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद गहरा रहा है। किसान मुआवजे की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं और 25 अगस्त को महापंचायत आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। वे अदालत में मुआवजे की रकम जमा होने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगा रहे हैं।

फरीदाबाद, धनंजय चौहान। नोएडा एयरपोर्ट को जोड़ने वाले निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के सोतई गांव में जमीन के मुआवजे और मालिकाना हक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को एनएचएआई के अधिकारी प्रशासनिक अमले और भारी पुलिस बल के साथ जमीन पर कब्जा लेने पहुंचे तो किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। किसानों ने मौके पर ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। किसानों ने मामले में 25 अगस्त को महापंचायत करने की तैयारी की है। जिसमें किसान यूनियन के बड़े नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। गाँव सोतई में रविवार को धरना स्थल पर वैदिक हवन का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने आहुति दी। हवन मा. रामजीत के नेतृत्व में कराया गया। धरना स्थल पर किसान नेता रतन सिंह अपने साथियों के साथ समर्थन देने पहुंचे। इस दौरान दयालपुर गांव से बबलू हुड्डा, मा. रामजीत, देवी सिंह लाम्बा जवा, सीताराम, कुकरिया, मोहरपाल मोहना, धरना अध्यक्ष ठाकुर धर्मवीर फौजी, झम्मन, रतनलाल, नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। किसानों ने कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलता, धरना जारी रहेगा। किसानों का आरोप है कि उन्होंने सरकार को कोई कब्जा नहीं दिया है और सभी मशीनें बंद करा दी हैं, जबकि प्रशासन द्वारा कब्जे को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है।इसे लेकर कल सुबह किसान महापंचायत आयोजित होगी।
1600 मीटर हिस्से में एक्सप्रेसवे का निर्माण प्रभावित
सोतई में करीब 1600 मीटर हिस्से में एक्सप्रेसवे का निर्माण प्रभावित है। करीब 14 से 15 एकड़ जमीन के मालिकाना हक और मुआवजे को लेकर किसान और प्रशासन आमने-सामने हैं। प्रशासन का कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मुआवजे की रकम अदालत में जमा कराई जा चुकी है। वहीं, किसानों का तर्क है कि अदालत में रकम जमा होने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं मिला है।
1908 के रिकॉर्ड का दे रहे हवाला
किसान संघर्ष समिति सोतई के आजाद तेवतिया ने बताया कि वर्ष 1908 के राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित जमीन किसानों के नाम दर्ज है। किसानों के मुताबिक अधिग्रहण के बाद उनके नाम मुआवजे के चेक तैयार हुए थे, लेकिन निर्धारित समय पर भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो गया। किसानों के अनुसार, वर्ष 2022 में डीआरओ ने नगर निगम से जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। नगर निगम ने जमीन पर अपना दावा होने से इनकार किया। बाद में मामला अदालत पहुंचा और मुआवजे की रकम भी अदालत में जमा कराई गई। धरने पर बैठे किसानों ने कहा जब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल जाता, वह अपनी जमीन बिल्कुल नहीं छोड़ेगे।


