हरिद्वार में गंगा एक्सप्रेसवे का विरोध तेज, किसानों ने उपजाऊ जमीन देने से किया इनकार
मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेस-वे को हरिद्वार से जोड़ने की योजना का विरोध हो रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया है कि एक्सप्रेस-वे को गंगा के किनारे विकसित किया जाए, ताकि कृषि और आजीविका को नुकसान न पहुंचे।

मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेस-वे को हरिद्वार से जोड़ने की प्रस्तावित योजना का जिले में विरोध शुरू हो गया है। जमालपुर कलां, सराय और आसपास के कई गांवों के किसानों ने उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित किए जाने का विरोध किया है, किसानों ने कहा कि वे अपनी जमीन नहीं देंगे। किसानों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन खेती और आजीविका की कीमत पर नहीं। किसानों का कहना है कि उनकी अधिकांश जमीन सिंचित और अत्यंत उपजाऊ है। यदि इसका अधिग्रहण किया गया तो बड़ी संख्या में किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। भविष्य में कई परिवार भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार को परियोजना का ऐसा विकल्प तलाशना चाहिए, जिससे खेती पर असर न पड़े।
किसानों के सुझाव
परमिल, विकास, अंकित, सुरेंद्र पाल, अतुल कुमार, बृजमोहन सिंह समेत anderen किसानों ने सुझाव दिया है गंगा एक्सप्रेस-वे को गंगा के किनारे-किनारे विकसित किया जाए। उनका तर्क है कि इससे गंगा तटीय क्षेत्रों का विकास होगा। साथ ही जंगल से आबादी की ओर हाथियों और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही पर भी रोक लग सकेगी। उनका यह भी कहना है कि गंगा किनारे बेहतर सड़क बनने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को भी राहत मिल सकती है।
भूमि अधिग्रहण की मांगें
किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि यदि किसी कारणवश भूमि अधिग्रहण किया जाता है तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और समुचित मुआवजे की स्पष्ट व्यवस्था हो। साथ ही सड़क निर्माण के दौरान खेतों की जल निकासी और सिंचाई व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए, ताकि भविष्य में जलभराव और फसलों के नुकसान जैसी समस्याएं पैदा न हों।
बैठक की जानकारी
हाल ही में जमालपुर कलां में आयोजित किसानों की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जमालपुर कलां, बहादुरपुर जट, गाडोवाली, किशनपुर, कटारपुर, फेरुपुर और रानी माजरा समेत कई गांवों के किसानों ने भाग लिया। किसानों ने एक स्वर में कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण स्वीकार नहीं होगा और परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया जाना चाहिए।


