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11 जनवरी, 2021|4:13|IST

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किसानों का दिल्ली कूच: लाख कोशिशों के बावजूद पीछे नहीं हटे अन्नदाता, सरकार बोली- सभी मुद्दों पर विचार विमर्श को तैयार

farmers to start a march towards delhi from saturday   ht photo

केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में 'दिल्ली चलो' मार्च के तहत राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने वाले किसानों को चार और अन्न दाताओं का साथ मिलने जा रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ट्रैक्टर ट्रॉलियों में शामिल किसान पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ शामिल होकर कृषि कानूनों का विरोध करेंगे। इनके यूपी के रास्ते दिल्ली में प्रवेश करने की उम्मीद है।

बता दें कि ष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर जमा हजारों किसानों को उत्तरी दिल्ली के एक मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत मिलने के बाद शहर के आसपास शुक्रवार को सुबह से बना तनाव का माहौल कुछ हद तक खत्म हो गया। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ 'दिल्ली चलो मार्च के तहत विभिन्न स्थानों पर जमा किसानों को रोकने के लिए घंटों तक पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारों का भी प्रयोग किया लेकिन किसान नहीं माने। कई जगहों पर किसानों ने पथराव किया और बैरिकेड भी तोड़ डाले।

टिकरी बॉर्डर से किसानों को निरंकारी मैदान तक छोड़ने के लिए दोपहर तीन बजे पुलिस भी उनके साथ गयी। लेकिन सिंघू बॉर्डर पर जमा किसान शाम तक शहर में प्रवेश नहीं कर पाए। पंजाब से दिल्ली आने के लिए यह मुख्य मार्ग है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को किसानों की मांगें माननी होंगी और 'काले कानून वापस लेने होंगे। राहुल ने ट्वीट किया, ''प्रधानमंत्री को याद रखना चाहिए था कि जब-जब अहंकार सच्चाई से टकराता है, पराजित होता है। सच्चाई की लड़ाई लड़ रहे किसानों को दुनिया की कोई सरकार नहीं रोक सकती। 

कांग्रेस नेता ने कहा, ''नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को किसानों की मांगें माननी ही होंगी और काले क़ानून वापस लेने होंगे। ये तो बस शुरुआत है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदर्शन के अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल के लिए किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने ट्वीट किया, उन्हें (केंद्र सरकार) कृषि कानूनों पर किसानों की चिंताओं का तत्काल समाधान करना चाहिए। 

वहीं, पंजाब के किसान संगठनों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें दिल्ली में एक जगह आंदोलन करने की इजाजत दे दी। क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने दावा किया, हमें दिल्ली जाने के लिए रास्ता देने की अनुमति दे दी गई है। इससे पहले, दिल्ली की सीमाओं पर कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी रही। मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा से आ रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने तमाम प्रयास किए। ड्रोनों से भी नजर रखी गयी और आंसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली की सीमा से दूर राजमार्गों पर भी तनाव की स्थिति रही, जगह-जगह किसान धरने पर बैठ गए और राष्ट्रीय राजधानी जाने की अनुमति मिलने का इंतजार करने लगे। दिल्ली पुलिस ने सिंघू बॉर्डर पहुंचे किसानों के एक समूह पर आंसू गैस के गोले दागे, जबकि टीकरी बॉर्डर पर सुरक्षा कर्मियों ने किसानों को राष्ट्रीय राजधानी में आने से रोकने के लिए उन पर पानी की बौछारें की।

सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा कर्मियों द्वारा आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किए जाने के बाद वहां घना धुआं देखा गया। वहीं टीकरी बॉर्डर पर किसानों की पुलिस से झड़प हो गई और उन्होंने अवरोधक के तौर पर लगाए ट्रक को जंजीरों (चैन) के जरिए ट्रैक्टर से बांध वहां से हटाने की कोशिश की।

किसानों के प्रदर्शन मार्च के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने आप सरकार से शहर के नौ स्टेडियम को अस्थायी जेल बनाने की अनुमति भी मांगी। दिल्ली पुलिस के अनुरोध को खारिज करते हुए दिल्ली के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि हर भारतीय नागरिक को शांतिपूर्वक विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है जिसके लिए उन्हें जेलों में नहीं रखा जा सकता। 

प्रमुख गृह सचिव को लिखे पत्र में जैन ने कहा कि केंद्र सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए और किसानों को जेलों में डालना इसका समाधान नहीं है। किसी तरह सिंघू बॉर्डर पहुंचे, पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के एक किसान ने कहा, ''हम दिल्ली जाएंगे। हम चाहते हैं कि किसान विरोधी कानून वापस लिए जाएं। दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले से हमारा स्वागत किया। 

सिंघू बॉर्डर पहुंचे कुछ किसानों ने कहा कि वे रात में अलग-अलग स्थानों पर रूक गए थे और पानीपत में अवरोधकों को तोड़ दिया। पंजाब के किसानों का समूह सबसे पहले यहां पहुंचा। उसके बाद उनके साथ हरियाणा के किसान भी आए।  राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं से लगे कई स्थानों पर यातायात का मार्ग बदल दिया गया। दिल्ली-गुड़गांव सीमा पर वाहनों की तलाशी भी बढ़ा दी गई, जिससे वहां जाम लग गया।

दिल्ली-गुड़गांव सीमा पर सीआईएसएफ के कर्मियों को भी तैनात किया गया। दिल्ली यातायात पुलिस ने ट्वीट कर लोगों से रिंग रोड, मुकरबा चौक, जीटीके रोड, एनएच- 44 और सिंघू बॉर्डर की बजाय दूसरे रास्तों से गुजरने की अपील की। तीस से अधिक किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पंजाब के किसानों ने घोषणा की थी कि वे लालडू, शंभु, पटियाला-पिहोवा, पातरां-खनौरी, मूनक-टोहाना, रतिया-फतेहाबाद और तलवंडी-सिरसा मार्गों से दिल्ली की ओर रवाना होंगे। 

'दिल्ली चलो मार्च के लिए किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर राशन और अन्य आवश्यक सामान के साथ मार्च के लिए निकले। हरियाणा सरकार ने किसानों को प्रदर्शन के लिए एकत्रित होने से रोकने के लिए कई इलाकों में सीआरपीसी की धारा 144 भी लागू कर दी। दिल्ली मेट्रो ने भी घोषणा की थी कि पड़ोसी शहरों के लिए सेवा शुक्रवार को स्थगित रहेगी। किसान नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नये कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।

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  • Web Title:Farmers protest against agricultural law government says ready to discuss all issues 4 states to join protest in Delhi