Bulandsehar News: आलू पर मंदी की मार, जिले के कोल्ड स्टोरों से निकला मात्र 15 फीसदी आलू
Bulandsehar News: -जिले में पांच से सात रुपये किलो तक गिरे दाम, मंडियों में मांग घटने से बाहर की सप्लाई भी ठप-जिले में पांच से सात रुपये किलो तक गिरे दाम, मंडियों में म

Bulandsehar News: बुलंदशहर। जिले के आलू उत्पादक किसान इस समय भीषण आर्थिक मंदी और दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। बाजार में आलू के दाम पूरी तरह धराशायी होने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि मंडियों में आलू मात्र पांच से सात रुपये प्रति किलो बिक रहा है। दामों में आई इस भारी गिरावट के चलते किसान कोल्ड स्टोरेज से अपना आलू निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, जिसके कारण अब तक जिले के 60 कोल्ड स्टोरों से मात्र 15 प्रतिशत आलू की ही निकासी हो सकी है। 85 फीसदी आलू अभी भी कोल्ड स्टोरों में डंप पड़ा हुआ है। किसान भी आलू के महंगा होने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत निकल सके। आलू कारोबारी गिरिराज सिंह बताते हैं कि इस समय मंडी में आलू का कट्टा 400 से लेकर 700 रूपये तक का है। बाजारों में यही आलू पांच रुपये किलो तक जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो माह बाद से आलू की फसल की बुआई शुरू हो जाएगी और कोल्ड स्टोरों से आलू निकला तक नहीं है। ऐसे में आलू के दाम महंगे होने के चांस काफी कम है आगे दाम और गिरने की संभावना है। इन दिनों में कोल्ड स्टोरों से करीब 40 फीसदी से अधिक आलू निकल जाता था, इस बार हालात काफी बुरे देखने को मिल रहे हैं।
जिले में नौ हजार हेक्टेयर पर रकबा
उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार जिले में लगभग 9,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने आलू की फसल बोई थी। बंपर पैदावार को देखते हुए उद्यान विभाग की देखरेख में जिले के 60 कोल्ड स्टोरों में 4.70 लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू का भंडारण कराया गया था। किसानों को उम्मीद थी कि सीजन आगे बढ़ने पर आलू के बेहतर दाम मिलेंगे, लेकिन बाजार का गणित पूरी तरह उलझ गया। मंदी के कारण हालत यह है कि अब तक किसान कोल्ड स्टोरों से केवल 65 हजार मीट्रिक टन आलू ही निकाल पाए हैं, जबकि चार लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू अभी भी कोल्ड स्टोरों में बंद है। किसान इस समय आलू निकलने के बिल्कुल भी मूड में नहीं है। चिप्सौना आलू का बोरा महज 400 रुपये और एस-4 आलू का बोरा 300 रुपये तक बिक रहा है। किसानों का कहना है कि एक बोरा आलू कोल्ड स्टोर से निकालकर मंडी तक पहुंचाने में ही भारी खर्च आ जाता है।
दूसरे राज्यों में नहीं जा रहा आलू
आलू कारोबारी गिरिराज सिंह बताते हैं कि गिरावट की एक प्रमुख वजह बाहरी मंडियों में मांग का पूरी तरह ठप होना भी है। सामान्य दिनों में जिले का आलू दिल्ली एनसीआर के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और दक्षिण भारत के राज्यों में बड़े पैमाने पर भेजा जाता था। इस बार अन्य राज्यों में भी स्थानीय उत्पादन पर्याप्त होने और बाहरी मंडियों में सुस्ती के कारण जिले से आलू का निर्यात लगभग रुक गया है। बाहर आलू न जाने की वजह से स्थानीय मंडियों में आवक का दबाव बढ़ गया है और खरीदार बेहद कम भाव लगा रहे हैं। किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आगामी सीजन की आ गई है। सितंबर माह के अंत से अगेती आलू की बुआई का काम शुरू होने जा रहा है। किसान खेतों की जुताई, खाद और बीज की व्यवस्था में जुटने लगे हैं लेकिन पुराना आलू न बिकने और कोल्ड स्टोरों में पूंजी फंसे होने से उनके सामने नगदी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पुराना आलू बिक नहीं रहा है और अगली फसल की तैयारी के लिए हाथ खाली हैं।
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जिले के कोल्ड स्टोरों से अभी तक 15 फीसदी आलू निकला है, किसान धीरे-धीरे आलू को निकाल रहे हैं। इस समय आलू के दाम कुछ कम हैं। आने वाली नई फसल की तैयारी चल रही है। कोल्ड स्टोरों में अभी आलू है। आलू के दाम सामान्य होने की उम्मीद है।
-दिनेश कुमार अरूण, डीएचओ


