गुठनी में नदी के अचानक बढ़े जलस्तर से किसान चिंतित
सरयू नदी के अचानक बढ़ते जलस्तर से गुठनी के किसानों में चिंता का माहौल है। बाढ़ के कारण 530 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। धान, मक्का और मूंगफली की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। जल संसाधन विभाग ने बाढ़ के खतरों की निगरानी बढ़ाई है।

गुठनी, एक संवाददाता। सरयू नदी के अचानक बढ़ते जलस्तर से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भीषण गर्मी और सुखाड़ के बाद अब बाढ़ और जलजमाव का लगातार उन्हें सामना करना पड़ रहा है। कारण सरयू नदी के दुबारा जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से घुस गया है। जिससे करीब 530 एकड़ कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई है। जबकि 16 गांवो के किसानो के सामने खरीफ फसलों की खेती को बचाने की भी कोई विकल्प नहीं है। किसानो का कहना है की पहले से खेतो मे बाढ़ का पानी जमा हुआ था। अब दोबारा बाढ़ आने से खेतों में लगे पानी को निकल से महीने लग जाएंगे। सरयू नदी और गंडक में लगातार तीसरे दिन जलस्तर में वृद्धि जारी है। इससे आधा दर्जन से अधिक गांव के निचले इलाकों में पानी घुस गया। जल संसाधन विभाग के जेई शुभम सिंह ने बताया कि सरयू नदी का वर्तमान जलस्तर 61.24 है। सरयू नदी का डेंजर लेवल से 60.82 और वार्निंग लेबल 59.82 से .48 सेंटीमीटर उपर बह रही है।
बाढ़ का पानी खरीफ खेती के लिए मुसीबत बना
गुठनी और दरौली में जहां सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, जलस्तर बढ़ने के बाद नदी का पानी निचली इलाकों में घुस रहा है। जिससे कृषि योग्य भूमि पूरी तरह बाढ़ की पानी में घिर गई है। किसानों के सामने समस्या इस बात की है कि अगर धान की फसल में लगातार बाढ़ का पानी जमा रह गया तो वह सड़ - गल कर बर्बाद हो जाएगी। वहीं मक्का, मूंगफली, अरहर की खेती भी पूरी तरह बर्बाद हो रही है।
विभाग ने गोगरा तटबंध पर शुरू किया निगरानी
सरयू नदी में बढ़ते जलस्तर से जहां तक तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों की नींद उड़ा दी है। वहीं विभाग ने गोगरा तटबंध पर निगरानी भी बढ़ा दिया है। विभाग द्वारा गोगरा तटबंध और सीमावर्ती इलाकों का दौरा और निरीक्षण किया गया है। वावजूद लोगों में आक्रोश इस बात से है कि विभाग द्वारा बाढ़ से पूर्व कोई तैयारी और जांच नहीं की गई। जब जलस्तर बढ़ने लगता है। तब खानापूर्ति के लिए विभाग निगरानी और जांच शुरू कर रहा है। और उसका नतीजा शून्य है। बाढ़ का असर सोहगरा, सोनहुला, श्रीकरपुर, गोहरुआ, गुठनी, योगियाडीह, बलुआ, तिरबलुआ, ग्यासपुर, दरौली, नरौली, केवटलिया गांव से सटे इलाकों पर होता है।


