मौसम की बेरुखी से खरीफ फसलों पर मंडरा रहे संकट के बादल
गौहनिया,हिन्दुस्तान संवाद।अल्प वर्षा की वजह से भले ही किसान खरीफ फसल की बोआई न कर पा रहें हों, लेकिन बारा इलाके में अभी तक लक्ष्य के विरुद्ध सर्वाधिक

अल्प वर्षा की वजह से भले ही किसान खरीफ फसल की बोआई न कर पा रहें हों, लेकिन बारा इलाके में अभी तक लक्ष्य के विरुद्ध सर्वाधिक सात प्रतिशत बोआई के साथ पहले स्थान पर है। जबकि लापर क्षेत्र बोआई के मामले में सबसे पीछे है। यमुनापार में स्थिति यह है कि यहां अभी तक रोपाई पद्यति से धान की बोआई कम ही शुरू हो पाई है। किसानों ने धान की नर्सरी तो तैयार कर ली है। रोपाई लगाने के लिए अब वे बारिश होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस समय मानसून का मौसम होने के बावजूद भीषण गर्मी और उमस ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से बारिश का सिलसिला रुक जाने के कारण तापमान में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। तेज धूप और उमस भरे मौसम का असर अब खरीफ सत्र की फसलों पर दिखाई देने लगा है। धान और अन्य खरीफ फसलें इस समय महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे समय पर्याप्त वर्षा नहीं होने और लगातार तेज धूप पड़ने से खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है। कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो दोबारा बोआई की नौबत आ सकती है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान का खतरा भी मंडराने लगा है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर बीज और खाद खरीदे हैं, उनकी चिंता सबसे अधिक बढ़ गई है। खरीफ फसलों के लिए शुरुआती दौर में नियमित और संतुलित वर्षा बेहद आवश्यक होती है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने और गर्मी से पौधों की जड़ें कमजोर पड़ सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञ आकाश मिश्र का कहना है कि ऐसे में अगले दो-तीन दिनों के अंदर तापमान तीन से तीन डिग्री उछल सकता है। कुल मिलाकर लोगों को एक बार फिर गर्मी से परेशान होना पड़ेगा। मौसम में बदलाव की संभावना तभी बनेगी जब मानसूनी हवाओं का रुख इलाके की तरफ होगा और मेघ मेहरबान होंगे।


